दूषित जलापूर्ति का प्रकरण
पुणे – गुइलेन बॅरे सिंड्रोम (जी.बी.एस.) से संक्रमित सिंहगड मार्ग परिक्षेत्र में दूषित जलापूर्ति करने वाले १९ ‘आर.ओ. प्लांट’ (निजी जल शुद्धीकरण संयंत्रों) पर ताले लगा दिए गए हैं । यहां के पानी में क्लोरिन की मात्रा शून्य प्रतिशत मिलने पर यह कार्यवाही की गई । प्रशासन ने धायरी, नांदेडगांव, किरकटवाडी तथा आसपास के ३० निजी जल शुद्धीकरण केद्रों से जल के नमूने लेकर उनकी जांच की । ऐसे १९ केंद्रों के जल नमूनों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक जीवाणु पाए गए । (सामान्य नागरिकों के आरोग्य और प्राणों से खिलवाड करने वाले संयंत्रों को तो स्थाई रूप से बंद करना चाहिए ! – संपादक)
जल संयंत्र चलानेवाले स्वामियों का प्रश्नबंद किए गए संयंत्रों के कुछ स्वामियों ने इस प्रकरण में महापालिका से पूछा, ‘हमारा पानी दूषित नहीं है । उसमें विषाणु नहीं हैं, तो संयंत्र क्यों बंद किया गया ?’ इसपर महापालिका के अधिकारियों ने कहा, ‘‘विषाणु नहीं मिले, परंतु पानी में क्लोरिन की मात्रा शून्य प्रतिशत है और वह भारी भी है । इसलिए, वह पानी पीने योग्य नहीं है ।’’ तब जल शुद्धीकरण केद्रों के कुछ स्वामियों ने प्रतिप्रश्न किया कि हम जो जलापूर्ति करते हैं, वह महानगरपालिका का ही होता है । हम केवल उसे टंकी में भर कर नागरिकों को देते हैं । उसमें क्लोरिन क्यों नहीं होता ? आप पानी में क्लोरिन क्यों नहीं मिलाते ? (महापालिका का शुद्ध किया हुआ पानी चुराकर बेचने वाले चोरों के विरुद्ध क्या महापालिका कठोर कार्यवाही करेगी ? – संपादक) |

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