लक्ष्मीतत्त्व आकृष्ट करनेवाली रंगोली

२७ बिंदियां और २७ रेखाएं
दिवाली में सीढियों पर अथवा मार्ग के दोनों किनारों पर बनाई जानेवाली रंगोली !

मार्ग के दोनों किनारों पर स्वागत के लिए खडे रहनेवालों द्वारा हाथ में पकडी दीप की थालियों के दीपों की ज्योति की दिशा उस मार्ग पर से जानेवाले व्यक्तियों की ओर होती है । सीढियों पर रंगोली इसी प्रकार बनाएं । (संदर्भ : सनातन का ग्रंथ ‘सात्त्विक रंगोलियां’)
घर की दहलीज पर एक पट्टी में बनाई जानेवाली रंगोलियां !

रंगोली स्वरूप बनाए जानेवाले कुछ शुभचिन्ह !

सावधानी रखें कि देवी-देवता एवं राष्ट्रपुरुषों से संबंधित रंगोलियां बनाते समय उनका अनादर न हो !
अध्यात्मशास्त्र का सिद्धांत है कि किसी भी घटक से संबंधित शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध एवं उनसे संबंधित शक्ति का सहअस्तित्व होता है । यही सिद्धांत देवी-देवता, राष्ट्रपुरुष, उनके नाम, शुभचिन्हयुक्त रंगोलियों पर भी लागू है । इसलिए ऐसी रंगोलियां बनाते समय और बनाने के पश्चात उनका अनादर न हो, इसकी सावधानी बरतें । ये रंगोलियां रास्ते पर बनाना टालें । ऐसी रंगोलियां त्योहार, उत्सव या कार्यक्रम होने के पश्चात झाडू से न निकालें, अपितु गीले कपडे से एकत्र कर विसर्जित करें ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !