मंदिरों में अर्पण के रूप में आनेवाले धन का उपयोग मंदिरों के ही जीर्णोद्धार तथा रखरखाव के लिए करना आवश्यक ! – गिरीश शाह, न्यासी, महाजन एन्.जी.ओ., मुंबई  

मंदिर संस्कार, संस्कृति तथा सुरक्षा का मुख्य केंद्र होता है । काल के प्रवाह में जो मंदिर जीर्ण हुए हैं, उनका पुनर्निर्माण तथा रखरखाव आवश्यक है ।

हिन्दुत्वनिष्ठों को ‘डिजिटल’ योद्धा बनना चाहिए ! – स्वप्नील सावरकर, संपादक, हिन्दुस्थान पोस्ट (डिजिटल मीडिया हाऊस), मुंबई, महाराष्ट्र

माध्यमों में हिन्दुत्व के प्रति नकारात्मकता है । आज का युग ‘डिजिटल’ युग है । क्या हम इस ‘डिजिटल’ युग की नई क्रांति में सम्मिलित होने के लिए तैयार हैं ?