
१. ध्यान के कारण शरीर में स्थित ‘स्ट्रेस हार्माेन’ (मानवीय शरीर में तनाव उत्पन्न करनेवाला संप्रेरक) ‘कोर्टिसोल’ का स्तर अल्प होता है । इससे चिंता, निराशा एवं चिढचिढाहट दूर होने में सहायता मिलती है ।

२. स्मरणक्षमता, ‘मूड’ (मन की स्थिति), नींद, भूख आदि को सुचारू रखनेवाले ‘एंडोकैनाबिनोइड सिस्टम’ पर सीधे परिणाम कर उक्त बातों में सुधार लाने में सहायता मिलती है ।
३. एकाग्रता एवं स्मरणक्षमता में वृद्धि होती है ।
४. बडों में रक्तचाप नियंत्रित रहने में सहायता मिलती है । हृदय के स्वास्थ्य में सुधार आता है । शरीर का विदाह अल्प होकर रोग का प्रतिकार करने की क्षमता में सुधार आता है ।
५. वर्तमान समय में आवश्यक एवं सीखनेयोग्य बात है भावनाओं पर सुनियंत्रण ! ध्यान से यह क्षमता भी बढती है ।
– वैद्या (श्रीमती) स्वराली शेंड्ये, यशप्रभा आयुर्वेद, पुणे.
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