
‘हमें यह सीख मिलती है कि हमें भी अधर्म के साथ अधर्म से ही युद्ध करना चाहिए। इस इतिहास को भूल जाने के कारण हिंदुओं की स्थिति महाभारत के युद्ध में भ्रमित अजुर् न के समान तथा महम्मद गौरी के हाथों मारे गए पृथ्वीराज चौहान जैसी हो गई है। प्रतिदिन हिंदू स्त्रियों पर इतने अत्याचार हो रहे हैं, फिर भी हिंदू समाज की ओर से विशेष प्रतिकार होता हुआ दिखाई नहीं देता; क्योंकि हम इस शिक्षा को पूर्णतः भूल चुके हैं। अब समय आ गया है कि हम पुनः उसकी ओर लौटें। जब तक हम लड़ाकू वृत्ति का निर्माण नहीं करेंगे, तब तक हमें मुक्ति प्राप्त नहीं होगी। इसके लिए अपने बच्चों को सैन्य प्रशिक्षण देना आवश्यक है।’
– श्री गिरिधर मामिडी, तेलंगाना अखिल भारतीय सदस्य, प्रज्ञा प्रवाह (दैनिक सनातन प्रभात, १०.६.२०२६)
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