परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ‘हिन्दू राष्ट्र आएगा’, केवल इतना कहते ही नहीं, अपितु उसे साकार करने के लिए भी प्रयत्नरत !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों की भाषा, वेशभूषा आदि भिन्न होते हुए भी सभी लोग हिन्दू धर्म से होने के कारण एक-दूसरे से जुडे हुए हैं और उनमें एकसूत्रता है; किंतु अभी तक भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित नहीं किया गया है । वास्तव में इस काल में सर्वधर्मसमभाव का व्यर्थ डंका पीटे जाने के कारण यहां की बहुसंख्यक जनता भूल गई है कि ‘हम हिन्दू हैं’ । इसलिए कोई स्वयं का ऐसा उल्लेख भी नहीं करता । सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने वर्ष २०१२ में सर्वप्रथम बताया कि ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना क्यों आवश्यक है ?’ उन्होंने ‘हिन्दू राष्ट्र’ का अर्थ केवल हिन्दुओं का राष्ट्र नहीं, अपितु ‘धर्माचरण करनेवाली, नैतिक तथा राष्ट्रहित के प्रति सजग प्रजा और शासक से युक्त राज्य’, ऐसी संकल्पना प्रस्तुत की । संक्षेप में उन्होंने बताया कि ‘हिन्दू राष्ट्र रामराज्य के समान होगा ।’

सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी

तदुपरांत वर्ष २०२२ में हिन्दुत्वनिष्ठ नेता तथा भविष्यवक्ता कह रहे थे, ‘वर्ष २०३० में हिन्दू राष्ट्र आएगा’; किंतु यह कोई नहीं बता रहा था कि ‘हिन्दू राष्ट्र आने के लिए क्या करना चाहिए ?’ इसके विपरीत, परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीे ने वर्ष २०१२ में केवल हिन्दू राष्ट्र के विषय में ही नहीं बताया, अपितु ‘उसके लिए क्या प्रयास करने चाहिए ?’ यह भी बताया और वे इसके लिए निम्न प्रकार से प्रयास भी करवा रहे हैं :

१. परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से पूरे भारत में सैकडों ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभाएं’ आयोजित हुईं, जिससे लोग जागृत व संगठित हुए हैं ।

२. वर्ष २०१२ से प्रतिवर्ष ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ आयोजित किया जा रहा है । साथ ही विभिन्न स्थानों पर प्रांतीय हिन्दू अधिवेशन भी हो रहे हैं ।

३. संत-महंत, हिन्दुत्वनिष्ठ, अधिवक्ता, उद्योगपति आदि को उन्होंने संगठित किया और उन्हें एक दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया ।

४. ‘शक्ति के बल पर नहीं, दैवी सामर्थ्य के बल पर ही धर्मस्थापना हो सकती है’, यह एकत्रित हुए लोगों को समझाकर उन्हें धर्माचरण और साधना करने के लिए प्रेरित किया ।

५. लोगों को सरलता से समझ में आनेवाले तथा पढने में सुगम ऐसे राष्ट्र, धर्म और अध्यात्म के विषयों पर ग्रंथ प्रकाशित किए ।

६. इतना ही नहीं, उन्होंने ८-१० वर्ष की आयु के बालसाधकों को भी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की दृष्टि से तैयार करना आरंभ किया है । यही पीढी आगे चलकर हिन्दू राष्ट्र का संचालन करेगी ।

७. उन्होंने केवल भारत में ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में अध्यात्म का प्रसार किया, जिसके परिणामस्वरूप विश्व के विभिन्न जाति-धर्मों के जिज्ञासु साधना कर रहे हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कहते हैं, ‘हिन्दू राष्ट्र आएगा, यह ईश्वरनियोजित है और ईश्वर ही इसके लिए प्रयास करवा रहे हैं !’

– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ, पीएच.डी., महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा.