जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज की प्रेरणा से ओल्ड गोवा में ३०० परिवारों ने हिन्दू धर्म में किया पुनर्प्रवेश

ओल्ड गोवा में ३०० परिवारों को पुनः हिन्दू धर्म में प्रवेश देने की विधि के समय

पणजी (गोवा) – ओल्ड गोवा के वायंगणी, तिसवाडी स्थित श्री देव गोवेश्वर महाशिव मंदिर के कलशारोहण एवं प्राणप्रतिष्ठा समारोह के उपलक्ष्य में १४ फरवरी को ३०० परिवारों ने हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश किया । इस समारोह में पूरे देश के अनेक अखाडों के संत-महंत उपस्थित थे । वेदशास्त्र संपन्न भालचंद्र शास्त्री शौचे गुरुजी ने धार्मिक अनुष्ठान किया ।

विदेशी एवं विधर्मी धर्मप्रचारकों ने इन परिवारों का बुद्धिभ्रम कर तथा उन्हें लालच देकर ईसाई धर्म का स्वीकार करने के लिए बाध्य किया था; परंतु अब इन परिवारों को हिन्दू धर्म को त्यागने का पश्चाताप हुआ । जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने उन्हें विश्वास दिलाया । वे भी महाराज के उद्धारक विचारों से प्रेरित हुए तथा उन्होंने हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश करने की इच्छा व्यक्त की । अंततः १४ फरवरी को उन्होंने जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज की उपस्थिति में हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश किया । जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने आज तक ऐसे मार्ग से भटके हुए १ लाख ५३ सहस्र ६४३ लोगों का समय-समय पर हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश कराया है । उनका यह महान धर्मकार्य अविरत जारी ही है । अनेक मान्यवरों ने उनके इस कार्य का गौरव किया है ।

महाशिवरात्रि के दिन प्राणप्रतिष्ठा एवं कलशारोहण

ओल्ड गोवा के वायंगणी में गोवेश्वर महाशिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर प्राणप्रतिष्ठा एवं कलशारोहण समारोह विधिवत संपन्न हुआ । इस समय गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुलक्षणा सावंत ने धार्मिक अनुष्ठान किए ।

इस समारोह में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज, प.पू. कानिफनाथ महाराज, साथ ही विभिन्न अखाडे के साधु-संत उपस्थित थे । इस दिन दोपहर को गोवा के राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू के करकमलों ने ‘गोवेश्वर महिमा संहिता’ ग्रंथ का लोकार्पण किया ।

ग्रंथ प्रकाशन की भूमिका बताते समय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के प्रति गौरवोद्गार

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘गोवेश्वर महिमा संहिता’ ग्रंथ के प्रकाशन के पीछे की भूमिका बताते हुए जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने उपस्थित सभी का आभार व्यक्त किया एवं सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का विशेष उल्लेख किया । उनके प्रति गौरवोद्गार व्यक्त करते हुए महाराजजी ने कहा, ‘‘आज सनातन के संत व साधक उपस्थित हैं । सनातन संस्था का कार्य उल्लेखनीय है ।

प.पू. डॉ. आठवलेजी व मेरे बहुत पुराने एवं घनिष्ठ संबंध हैं । हम दोनों की संकल्पना से ही ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ की स्थापना हुई है ।’’ इस अवसर पर श्री संप्रदाय की ओर से सनातन की श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी का सम्मान किया गया । इस समय सनातन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस, श्री. नारायण नाडकर्णी एवं महावीर श्रीश्रीमाळ उपस्थित थे ।

सनातन संस्था की ओर से जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज का सम्मान

जगदगुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराजजी को सनातन-निर्मित शिवजी का सात्त्विक चित्र देकर सम्मान करतीं श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी

ओल्ड गोवा – ‘गोवेश्वर महिमा संहिता’ ग्रंथ का लोकार्पण होने के उपरांत सनातन संस्था की ओर से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज तथा उनके उत्तराधिकारी प.पू. कानिफनाथ महाराज को शॉल, श्रीफल एवं सनातन-निर्मित भगवान शिवजी का सात्त्विक चित्र भेंट कर सम्मानित किया । इस अवसर पर प.पू. महाराज ने कहा, ‘‘संत कैसे तेजस्वी होते हैं, यह सनातन के संतों की ओर देखकर ध्यान में आता है ।’’ प.पू. महाराज ने सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के स्वास्थ्य का स्मरणपूर्व क्षेमकुशल पूछा तथा उसके उपरांत सभी से कहा, ‘‘मुझे सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का कार्य बहुत अच्छा लगता है । लोग धर्म को समझ पाएं, इसलिए उन्होंने अनेक छोटे-छोटे ग्रंथ लिखे हैं । वे नाणिज में भी २ बार आए थे । मैं अपनी अगली गोवा यात्रा में डॉ. आठवलेजी से मिलने हेतु सनातन के आश्रम जानेवाला हूं ।’’ (१५.२.२०२६)

गोवेश्वर महादेव शिवलिंग के दर्शन करते (बाएं से) श्री. चेतन राजहंस, श्री. नारायण नाडकर्णी, श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी व श्री. महावीर श्रीश्रीमाळ