
नई देहली – रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट ने हाल ही में ‘वॉर क्लाउड ओवर द इंडियन होराइजन’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। कहा गया है कि २०२५ से २०३० तक भारत और चीन के बीच युद्ध होगा, ऐसा इसमे बोला गया था। चीन २०२० में गलवान में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद से तिब्बती सीमा पर आक्रामक तरीके से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। चीन की रणनीति तिब्बती नागरिकों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर तिब्बतीयों को भारत के खिलाफ किसी भी संभावित युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर करना है। इसके लिए चीन तिब्बती बच्चों को चीनी भाषा मदेरीयन सिखा रहा है। साथ ही उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। हाल ही में एक युवा तिब्बती लड़की को चीनी वायु सेना में भर्ती किया गया और उसे लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया।

१. चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की रणनीति तिब्बत को मुख्यधारा में शामिल करने के नाम पर तिब्बत को भारत के खिलाफ साबित करना और युद्ध की स्थिति में तिब्बतीयों को सेना में भेजना है। इसी रणनीति के तहत चीन ने हर तिब्बत परिवार के लिए एक सदस्य को सेना में भेजना अनिवार्य कर दिया है। चीन का यह कदम भारत के साथ बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में आया है। इससे पहले भी चीन भारतीय सीमा के पास तैनाती के लिए तिब्बतीयों को सेना में भर्ती करने का अभियान चला चुका है।
२. भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि २०२० के गलवान संघर्ष में मारे गए ३८ चीनी सैनिकों के नाम सामने आ गए हैं। उनमें से ८ तिब्बती थे और उनके नाम पिनयिन में तिब्बती नामों से मेल खाते थे। इस समय चीनी सेना में ७ हजार तिब्बती हैं। चीन को लगता है कि तिब्बती लोग लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं; क्योंकि वे वहां की जलवायु के आदी हो चुके हैं। दूसरी ओर, एक सामान्य चीनी सैनिक को सांस लेने में तकलीफ और ऊंचाई पर होने वाली बीमारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
३. चीन में विशेषज्ञता वाले सहायक प्रोफेसर राकेश कुमार ने कहा कि चीन अपने युवाओं पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करता है; क्योंकि वह जवानी की अहमियत जानता है। वह तिब्बती युवाओं को चीनी भाषा सिखा रहे हैं और उन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में विश्वास करना सिखा रहे हैं। चीन का मानना है कि चीन के इस प्रोपेगैंडा से तिब्बत पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
४. चीनी सेना तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से तिब्बतियोंको और नेपालियों की भर्ती कर रही है। चूंकि ये लोग हिंदी और नेपाली भाषा जानते हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जा रहा है। वे भारतीय सीमा पर खुफिया जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं। सैन्य अधिकारी ऐसे युवाओं की जासूसी करने के लिए समय- समय पर चीन के कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का दौरा भी करते हैं।
संपादकीय भूमिकायह इस बात का उदाहरण है कि भारत से नफरत करने वाला चीन भारत को हराने के लिए किस हद तक जा सकता है । भारत को चीन के साथ हर स्तर पर ऐसा करने में सक्षम होना चाहिए ! |
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