
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – व्यवस्थापन के ‘गुरुमंत्र’ सिखाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक विशेष पाठ्यक्रम आरंभ किया है । इसके अंतर्गत छात्रों को भगवद्गीता, रामायण, उपनिषद और आर्य चाणक्य की सीख आदि मंत्रों के रुप में सिखाया जाएगा । इस पाठ्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित लोगों द्वारा लिए व्यवस्थापकीय निर्णयों के साथ अष्टांग योग का भी अध्ययन होगा ।
यह पाठ्यक्रम १, २ अथवा ३ वर्षाें का होगा । पाठ्यक्रम पूर्ण करने के उपरांत छात्रों को क्रमशः प्रशस्तिपत्रक (सर्टिफिकेट कोर्स), पदविका (डिप्लोमा) और ‘बीबीए’ (बैचलर ऑफ बिजिनेस मैनेजमेंट) की पदवी (डिग्री) प्राप्त होगी । ५ वर्षाें का पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर ‘एम.बी.ए.’ की पदवी प्राप्त होगी ।

पाठ्यक्रम समन्वयक शेफाली नंदन ने कहा कि इस पाठ्यक्रम में भारतीय व्यवस्थापकीय विचार, आध्यात्मिकता और व्यवस्थापन, सांस्कृतिक लोकाचार, मानवीय मूल्य एवं व्यवस्थापन, अष्टांग योग, जीवन का समग्र दृष्टिकोन, ध्यानधारणा, तानतनाव आदि विषयों पर पारंपारिक अध्ययन कराया जाएगा । कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और नूतन उद्योगों का व्यवस्थापन (स्टार्टअप मैनेजमेंट) इनका भी प्रमुखरुप से समावेश किया गया है ।
भगवान श्रीकृष्ण के व्यवस्थापकीय निर्णयों का भी होगा पाठ्यक्रम में समावेश !
भगवान श्रीकृष्ण १४ विद्याएं और ६४ कलाओं से परिपूर्ण थे । उन्होंने कुशलतापूर्ण व्यवस्थापन के बल पर धर्म और सत्य के पक्ष में लडनेवाले पांडवों को सीमित संसाधन होते हुए भी सफलता प्राप्त करवा दी । यदि छात्र यह सब सीख लेंगे, तो जीवन के प्रत्येक चरण पर उन्हें सफलता ही मिलेगी । आज के प्रतियोगिता के युग में छात्रों को भगवद्गीता पढने को समय नहीं मिलता । अतः पाठ्यक्रम में ही इसका समावेश करने से इसके अध्ययन के लाभ का अनुभव उन्हें होगा । शेफाली नंदन ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा किए उपदेश छात्रों को विस्तृतरुप से समझाए जाएंगे ।
संपादकीय भूमिका
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(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीकृष्ण मुसलमान थे तथा ५ समय की नमाज पढते थे !’ – Maulana Jarjis Ansari
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