‘गुरुकृपायोगानुसार साधना’
कर्म, भक्ति तथा ज्ञानयोग का त्रिवेणी संगम ‘गुरुकृपायोग’, ईश्वरप्राप्ति का सरल मार्ग है । प्रस्तुत ग्रंथ में गुरुकृपायोग का महत्त्व, अन्य योगमार्गाें की तुलना में इस योगमार्ग से होनेवाली शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति, मृत्यु के उपरांत भी जीव पर गुरुकृपा होने की प्रक्रिया, ऐसे विविध अंगों के विषय में मार्गदर्शन किया गया है ।
गुरुकृपायोगकी महिमा
गुरुकृपा के माध्यमसे जीव को ईश्वरप्राप्ति होना, इसे ‘गुरुकृपायोग’ कहते हैं । इस ग्रंथ में ‘गुरुकृपायोगानुसार साधना’ के सिद्धांत, चरण इत्यादि की अभिनव जानकारी दी गई है । गुरुकृपा हेतु व्यष्टि एवं समष्टि साधना में समन्वय साध्य कर साधना करना तथा उसके लिए आवश्यक गुण आत्मसात करना, इसका भी विवेचन किया गया है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?