
हम उस परंपरा से आए हैं, जहां सत्य को आदर्श माना जाता है, तो झूठ को अधर्म माना जाता है । शत्रु के साथ लडने के लिए हिन्दुओं को स्वबोध अर्थात स्वयं के धर्म को समझ लेना आवश्यक है, साथ ही शत्रु का प्रतिकार करने के लिए शत्रुबोध करा लेना अर्थात ही शत्रु की गतिविधियों को समझ लेना भी आवश्यक है । कुरआन में गैरमुसलमानों के लिए ‘काफिर’ शब्द का प्रयोग किया गया है । कुरआन में काफिरों के विरुद्ध जिहाद करने का संदेश भी दिया गया है ।
महाराष्ट्र में वारी की परंपरा में मुसलमानों ने घुसपैठ की है । वारी में सहभागी मुसलमान श्री विठ्ठल की महिमा बता सकते थे; परंतु उन्होंने ‘अल्ला देवे, अल्ला दिलावे’, ऐसा बोला । पश्चिम बंगाल, कश्मीर, केरल जैसे मुसलमान बहुसंख्यक राज्यों में वे हिन्दुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में सम्मिलित नहीं होते । वे जहां अल्पसंख्यक होते हैं, वही ऐसे कृत्य कर निकटता बढाने का प्रयास करते हैं । अतः हिन्दुओं को पहले शत्रु की गतिविधयों को समझ लेना आवश्यक है, ऐसा स्पष्टतापूर्ण प्रतिपादन हरियाणा की ‘विवेकानंद कार्य समिति’के अध्यक्ष नीरज अत्री ने किया । वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव के पांचवें दिन (२०.६.२०२३ को) उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।
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