१. वाहन के संदर्भ में बुद्धि-अगम्य अनुभूतियां !
अ. वाहन में लगी कांच का अत्यंत पारदर्शी दिखाई देना : वाहन की खिडकी की कांच अत्यंत पारदर्शी हो गई है । ‘मानो वहां कांच हैं ही नहीं, वह इतने पारदर्शी हो गई है । वायुतत्त्व बढने के कारण यह परिवर्तन आया है ।
आ. वाहन में बैठने के उपरांत बाह्य जगत का विस्मरण हो जाता है । ‘हम किसी भिन्न लोक में हैं’, ऐसा प्रतीत होता है । उसमें बैठने पर बडी सहजता से ध्यान लगता है ।
इ. वाहन चलाते समय ‘वह भूमि पर नहीं टिका है, अपितु सडक पर तैर रहा है’, ऐसा प्रतीत होता है ।
ई. वाहन की थोडी सी ध्वनि भी नहीं आती ।
उ. वाहन में एक भिन्न प्रकार की सुगंध आती है । वाहन की मरम्मत करने के लिए दिए जाने पर वाहन विशेषज्ञों को भी यह सुगंध प्रतीत होती है ।
२. डेढ किलो मीटर तक सकारात्मक प्रभामंडल होना
‘यूनिवर्सल औरा स्कैनर (यू.ए.एस.)’ उपकरण से इस वाहन का सकारात्मक प्रभामंडल नापने पर वह १५११.६५ मीटर की दूरी तक था । सामान्य व्यक्ति अथवा वस्तु का प्रभामंडल २० मीटर तक हो सकता है ।
– श्री. विनायक शानभाग (१८.१०.२०२२)
साधना के कारण पंचमहाभूतों की मात्रा में वृद्धि दर्शानेवाले विभिन्न लक्षण‘जैसे-जैसे जीव की साधना बढती है, वैसे-वैसे देह में विद्यमान पंचमहाभूतों में जागृति आती है । उपासनामार्ग के अनुसार अथवा साधना के स्तर के अनुसार संबंधित तत्त्व का स्तर बढता है । उस समय देह पर उसके दृश्य परिणाम दिखाई देते हैं । कौन सा तत्त्व बढने पर किस प्रकार की अनुभूतियां होती हैं, इसकी जानकारी निम्न सारणी में दी गई है –
– सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळ (१४.११.२०२२) |

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?