
नई दिल्ली – दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के २० जुलाई को हुए आंदोलन में अपराधी सम्मिलित थे, यह चौंकानेवाली जानकारी दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के माध्यम से दी गई है । इस आंदोलन में पुलिस पर आक्रमण करने, वाहनों में तोडफोड करने आदि घटनाओं में सम्मिलित कुल २ सहस्र ८७३ लोगों की पुलिस ने जांच की । उनमें से ९८९ लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि (क्रिमिनल बैकग्राउंड) होने का पता चला है ।
989 Criminals Participated in the Delhi Protest! – Delhi Police
• This clearly shows that the protest was led by anti-social elements. The government must take strict action against such people!
• It should come as no surprise if the Congress, communists, progressives, and… pic.twitter.com/8XAcAZbky5
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 28, 2026
इस रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन स्थल पर रहे कई लोग केवल मामूली अपराधी ही नहीं, अपितु आदतन एवं बार-बार अपराध करनेवाले थे । इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, बलात्कार, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, शस्त्र अधिनियम (आर्म्स एक्ट), अपहरण, नशीले पदार्थों से संबंधित अपराध आदि सम्मिलित थे । इस मोर्चे में पूर्व में दंडित ९८९ लोग सम्मिलित हुए थे । इनमें से १०१ लोगों के विरुद्ध हत्या जैसे अत्यंत गंभीर अपराध प्रविष्ट हैं । पुलिस ने आधुनिक कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिस अधिकारियों एवं नागरिकों द्वारा बनाए गए वीडियो के आधार पर इन व्यक्तियों की पहचान की है ।
सम्मिलित आरोपियों पर प्रविष्ट अपराध

आंदोलकारियों को बार-बार चेतावनी !
पुलिस के अनुसार, केवल जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की अनुमति दी गई थी, संसद की ओर जानेवाले मोर्चे के लिए नहीं । इसके उपरांत भी, आंदोलनकारी अस्थायी बैरिकेड्स तोडकर संसद के अत्यंत निकट पहुंच गए । पुलिस का कहना है कि आंदोलनकारियों को बार-बार चेतावनी देने के पश्चात ही बल प्रयोग किया गया । कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घायल हुए; फिर भी उन्होंने संयम बनाए रखा ।
अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी ही !
रिपोर्ट में कहा गया है कि आपराधिक पृष्ठभूमिवाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई, बंदी बनाना एवं जांच जारी रहेगी । छात्रों के मामले में छूट दी जा सकती है ।
अवयस्कों एवं बिना आपराधिक पृष्ठभूमिवाले आंदोलनकारियों को छोडें ! – सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट)दिल्ली आंदोलन में सम्मिलित अवयस्कों एवं बिना आपराधिक पृष्ठभूमिवाले छात्रों को छोड दिया जाए, ऐसा आदेश उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को दिया । आपराधिक पृष्ठभूमिवाले व्यक्तियों पर यह कानूनी संरक्षण लागू नहीं होगा, यह स्पष्ट करते हुए न्यायालय ने सरकारों से कहा कि छात्रों के विरुद्ध प्रविष्ट किसी भी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के संबंध में दंडात्मक कार्रवाई न की जाए । आंदोलन करनेवाले छात्रों पर हुए पुलिस अत्याचार के आरोपों के साथ-साथ पुलिस कर्मियों पर हुए आक्रमणों के आरोपों की भी जांच की जाएगी । उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार सहित महाराष्ट्र, बिहार, असम, बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों को नोटिस भेजे हैं । न्यायालय ने आंदोलन से जुडे सभी वीडियो फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया । |
France Knife Attack : फ्रांस – मुसलमान व्यक्ति द्वारा गर्भवती महिला सहित तीन पर चाकू से आक्रमण !
बदलापुर में बेकरी के केक में चूहे का मल मिला ।
अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) में प्रश्नपत्र प्रकटन (लीक) का आरोप असत्य ! – महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC)
PM Modi Facebook Video : (और इनकी सुनिए… ) ‘फेसबुक पर प्रधानमंत्री मोदी का चलचित्र संदेश त्रुटि के कारण हटाया गया !’ – ‘मेटा’ संस्था
पश्चिम रेलवे में ५ वर्षों में टिकट दलाली के २ सहस्र ८८५ प्रकरण : बंदी बनाए गए लोगों की जानकारी ही उपलब्ध नहीं !
दिल्ली आंदोलन को लेकर संसद की कार्यवाही स्थगित