Pakistan Supreme Court : १२ वर्ष उपरांत पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों को मुक्त किया गया !

  • ईसाई पति-पत्नी को ईंट-भट्ठे में जिंदा जलाने का प्रकरण

  • पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दमन जारी

 

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – पाकिस्तान में १२ वर्ष पूर्व एक ईसाई पति-पत्नी को जिंदा जलानेवाले सभी आरोपियों को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने मुक्त कर दिया है ।

क्या था पूरा भयावह मामला ?

४ नवंबर २०१४ को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले में २६ वर्षीय शहजाद मसीह एवं उनकी २४ वर्षीय गर्भवती पत्नी शमा बीबी एक स्थानीय ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते थे । भट्ठे के मालिक के साथ उनका पैसों को लेकर विवाद चल रहा था । इसी कारण मालिक ने उन्हें वहां से जाने नहीं दिया । एक दिन षड्यंत्र रचकर इस दंपति पर कुरान का अपमान करने का झूठा आरोप लगाया गया । इसके पश्चात एक स्थानीय मौलवी (इस्लाम के धार्मिक नेता) ने मस्जिद से मुस्लिम भीड को भडकाया । देखते ही देखते १ सहस्र से अधिक लोगों की हिंसक भीड वहां एकत्र हो गई । भीड ने इस निर्दोष दंपति को पहले अमानवीय रूप से पीटा । उन्हें तडपाया तथा फिर जब वे जीवित थे, तब उन्हें जलती हुई ईंट-भट्ठे की आग में फेंक दिया ।

इस बर्बरता के उपरांत प्रारंभ में पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी न्यायालय ने कडा मत अपनाया था । न्यायालय ने ५ मुख्य आरोपियों को फांसी का दंड सुनाया था तथा अन्य ८ लोगों को कारावास भेजा था; परंतु समय बीतने के साथ उच्च न्यायालय ने प्रमाणों की कमी का कारण बताते हुए धीरे-धीरे सभी को मुक्त करना आरंभ कर दिया । अब १० जुलाई को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने बचे हुए अंतिम ३ मुख्य दोषियों का फांसी का दंड भी पूरी तरह निरस्त कर दिया । इतना ही नहीं, हिंसा में सम्मिलित अन्य १०२ आरोपियों को मुक्त किए जाने का विरोध करनेवाली पंजाब सरकार की याचिका भी सर्वोच्च न्यायालय ने निरस्त कर दी ।

पाकिस्तान की ‘कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकॉर्डिन ने इस मामले पर गहरा दुख व्यक्त किया । शुकॉर्डिन ने कहा कि पाकिस्तान में ईसाइयों एवं अन्य अल्पसंख्यकों के विरुद्ध होनेवाली लक्षित हिंसा के उपरांत उन्हें नियमित रूप से न्याय नहीं मिलता ।