४० सहस्र दानदाताओं से सवा दस करोड रुपये की धनराशि एकत्र करने का आरोप !
पाकिस्तान की ‘दावत-ए-इस्लामी’ संस्था के अंतर्गत कार्यरत है ‘अल् हलिमी फाउंडेशन’ !

सोलापुर – बार्शी के ‘अल् हलिमी फाउंडेशन’ मामले में सोलापुर के आतंकवाद-रोधी दल (‘ए.टी.एस.’) ने न्यायालय में लगभग १४ सहस्र पन्नों का आरोप-पत्र प्रस्तुत किया है । धर्मार्थ आयुक्त के पास पंजीकरण कराए बिना महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से ४ वर्षों में लगभग सवा दस करोड रुपये की धनराशि एकत्र करने का आरोप संस्था पर लगाया गया है । इस अवधि में प्रतिवर्ष औसतन १० सहस्र दानदाताओं से, जबकि कुल मिलाकर ४० से ४५ सहस्र दानदाताओं से धनराशि स्वीकार किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है ।
* पाकिस्तान की ‘दावत-ए-इस्लामी’ संस्था के अंतर्गत बार्शी का ‘अल् हलिमी फाउंडेशन’ कार्यरत है । संस्था के अध्यक्ष अंसार रफीक पठान (बार्शी), उपाध्यक्ष आरिफ रशीद बागवान (मोहोळ) और सचिव असलम लतीफ शेख (बार्शी) संस्था का संचालन देख रहे थे । इनमें से उपाध्यक्ष आरिफ बागवान एवं संस्था के लेखापाल को बंदी बनाया गया है, जबकि अध्यक्ष तथा सचिव फरार हैं । फाउंडेशन का कार्यक्षेत्र सोलापुर, बीड, धाराशिव ए एम पुणे जिलों तक सीमित था । इन क्षेत्रों में संस्था द्वारा ६ से ७ मदरसे चलाए जा रहे थे । जांच में उल्लेख किया गया है कि एकत्रित धनराशि से सैकड़ों विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी ।
* जांच में एक अन्य महत्त्वपूर्ण बात सामने आई है । ए.टी.एस. ने कहा है कि पाकिस्तान की ‘दावत-ए-इस्लामी’ संस्था से संबंधित भारत के विभिन्न राज्यों तथा महाराष्ट्र के अनेक जिलों में कुछ गैर-सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं । आरोप-पत्र में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ संस्थाओं ने फर्जी पंजीकरण संख्या का उपयोग करके बैंक खाते खोले तथा आयकर विभाग तथा ‘पैन कार्ड’ के लिए भी उसी पंजीकरण संख्या का उपयोग किया । इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि सामाजिक संस्था के नाम पर एकत्रित धनराशि में से ७० से ८० प्रतिशत राशि वेतन पर व्यय की गई दिखाई गई ।
* नियमित दानदाता कौन थे ? एकत्रित धनराशि का वास्तविक रूप से किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया ? इस प्रकरण में अन्य कौन-कौन लिप्त हैं ? साथ ही पाकिस्तान में संबंधित व्यक्तियों के साथ संस्था के पदाधिकारियों का संपर्क किस उद्देश्य से था ? इन सभी बातों की जांच आतंकवाद-रोधी दल द्वारा जारी है ।
‘दावत-ए-इस्लामी’ की पृष्ठभूमि
‘दावत-ए-इस्लामी’ संस्था की स्थापना वर्ष १९८१ में पाकिस्तान के कराची में मौलाना इलियास कादरी ने की थी । यह अंतरराष्ट्रीय सुन्नी इस्लामिक संस्था १७२ से अधिक देशों में कार्यरत है इसका मुख्यालय कराची में है । ‘मदनी चैनल’ नामक टेलीविजन चैनल, मदरसे एवं विभिन्न शैक्षिक संस्थाएं इस संस्था द्वारा संचालित की जाती हैं । आरोप-पत्र में उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान बार्शी के ‘अल् हलिमी फाउंडेशन’ के पदाधिकारियों के इस संस्था से संबंध होने की बात सामने आई है ।
तमिलनाडु : गोहत्या करने वालों का समर्थन करने वाले मुस्लिम संगठनों का हिंदुत्वनिष्ठों द्वारा विरोध
Mohammad Nawaz Baned : पाकिस्तान के क्रिकेटर मोहम्मद नवाज पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद द्वारा ३ महीने का प्रतिबंध
Pakistan Supreme Court : १२ वर्ष उपरांत पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों को मुक्त किया गया !
धर्मपरिवर्तन करने से जाति नहीं बदलती ।
Jantar Mantar Protest : जंतरमंतर पर चल रहा २३ दिन का अनशन समाप्त ।
Dhruv Rathee : ‘हिन्दुओं के देवता मांस खाते थे तथा मदिरापान करते थे’, ऐसा बोलनेवाले ध्रुव राठी का वीडियो २४ घंटे में हटाएं ।