Dhruv Rathee : ‘हिन्दुओं के देवता मांस खाते थे तथा मदिरापान करते थे’, ऐसा बोलनेवाले ध्रुव राठी का वीडियो २४ घंटे में हटाएं ।

  • केंद्र सरकार के शिकायत अपीलीय समिति का यूट्यूब को निर्देश  

  • अधिवक्र्ता अमिता सचदेवा की लडाई की फलश्रुति ।

  • अपराध पंजीकृत करने की मांग के लिए न्यायालय में याचिका ।

नई दिल्ली – सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत गठित शिकायत निवारण अपीलीय समिति ने यूट्यूबर (यू ट्यूब वाहिनी पर स्वयं के वीडियो प्रसारित करनेवाला व्यक्ति) ध्रुव राठी के हिन्दू देवताओं पर आधारित विवादित वीडियो पर प्रतिबंध लगाया है तथा यू ट्यूब को २४ घंटे के अंदर उस वीडियो को हटाने के निर्देश दिए हैं । समिति का यह कहना है कि इस वीडियो के कारण हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं ।

१. ध्रुव राठी के आधिकारित यूट्यूब वाहिनी से २१ मार्च २०२६ को ‘क्या हिन्दू गोमांस खा सकते हैं ? केरला स्टोरी २ का पर्दाफाश’, यह २१ मिनट का वीडियो प्रसारित हुआ था, जिस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा तथा ४ लाख से अधिक लोगों ने उसे पसंद किया ।

२. ‘द केरल स्टोरी २’, इस फिल्म पर भाष्य करते हुए राठी ने इस वीडियो में हिन्दुओं के खान-पान की आदतों पर टिप्पणी की । उसने गोमांस सेवन से जुडी संवेदनशीलता को बाजू में रखकर भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं सामाजिक धारणा पर चर्चा की । प्राचीन ग्रंथों, शास्त्रों एवं आधुनिक सर्वेक्षण का संदर्भ देते हुए राठी ने यह दावा किया कि रामायण एवं महाभारत की व्यक्तिरेखाएं उनके वनवास के काल में हिरन के मांससहित अन्य पशुओं के मांस का तथा मदिरा का सेवन करते थे । उसमें उसने प्रभु श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण एवं पांडवों का नाम लिया ।

२. अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने २२ मार्च २०२६ को इस वीडियो के विरोध में नई दिल्ली के ‘साइबर क्राईम सेल’में शिकायत प्रविष्ट की थी । उसके उपरांत २३ मार्च को यूट्यूब के शिकायत विभाग के अधिकारी से आधिकारित शिकायत पंजीकृत की गई ।

३. यूट्यूब ने इस वीडियो के विषय में अधिक जानकारी मंगाई तथा वीडियो का पुनर्लाेकन करने के उपरांत २५ मार्च को यह शिकायत निरस्त की । यूट्यूब ने इसे स्थानीय कानूनों का अथवा उसके सामूहिक मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लंघन मानने से मना किया, साथ ही शिकायतकर्ता को यह सुझाव दिया कि यदि यह वीडियो भारतीय कानून का उल्लंघन करता है, ऐसा उसे लगता हो, तो वे उसे ‘ब्लॉक’ करे अथवा न्यायालय से सहायता ले ।

४. इसके उपरांत अधिवक्ता सचदेवा ने २७ मार्च २०२६ को शिकायत निवारण अपीलीय समिति के पास अपील प्रविष्ट की । यह अपील २ माह से भी अधिक समय तक लंबित रही । उसके उपरांत उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रविष्ट की । ३ जुलाई २०२६ को न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकरण को इस प्रकरण पर शीघ्र निर्णय लेने का, साथ ही आदेश की प्रति को १५ दिन के अंदर न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया ।

५. समिति ने धार्मिक भावनाओं से जुडे प्रकरणों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का तर्क निरस्त करते हुए यूट्यूब को वीडियो हटाने के लिए कहा । समिति का यह कहना है कि इस वीडियो की पडताल से ऐसा दिखाई देता है कि इस वीडियो के कारण एक विशिष्ट समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं, जो संपूर्ण समाज के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं ।

६. राठी के विरुद्ध अपराध पंजीकृत करने की मांग को लेकर अधिवक्ता सचदेवा अब साकेत के दंडाधिकारी न्यायालय पहुंच गई हैं तथा वहां यह प्रकरण अभी लंबित है । इस पर १० सितंबर २०२६ को अगली सुनवाई होनेवाली है ।

ऐसे प्रकरणों पर शीघ्रातिशीघ्र निर्णय हो – अधिवक्ता अमिता सचदेवा

अधिवक्ता सचदेवा ने सामाजिक माध्यमों पर यह आदेश प्रसारित करते हुए इसे उचित दिशा में बढाया हुआ कदम कहा है । उन्होंने कहा कि निर्मिति के नाम पर आस्था का उपहास नहीं किया जा सकता । वास्तव में ऐसे प्रकरणों का निपटारा तुरंत होना चाहिए, क्योंकि जब तक इस पर चर्चा होती है, तब तक लाखों लोग ऐसे वीडियो देख चुके होते हैं तथा ऐसे वीडियो बनानेवालों को भी ‘विवादित वीडियो बनाईए तथा अधिक से अधिक दर्शक पाईए’, यही चाहिए होता है ।