Allahabad HC : बुलडोजर कार्यवाही के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विभाजित निर्णय !

  • एक न्यायमूर्ति ने ध्वस्तीकरण पर २ वर्ष की रोक लगाने का मत व्यक्त किया, जबकि दूसरे न्यायमूर्ति ने कहा कि विधिसम्मत वैधानिक कार्यवाही पर न्यायालय सामान्य रूप से रोक नहीं लगा सकता ।

  • अब इस प्रकरण की सुनवाई तीसरे न्यायमूर्ति के समक्ष होगी ।

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के पश्चात उसके मकान के ध्वस्तीकरण से उसे अस्थायी संरक्षण दिया जाना चाहिए अथवा नहीं, इस विषय पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई । दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस प्रकरण में विभाजित (भिन्न) निर्णय दिया । न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि अपराध दर्ज होने की तिथि से २ वर्ष तक आरोपी के मकान पर किसी प्रकार की ‘बुलडोजर कार्यवाही’ नहीं की जानी चाहिए । वहीं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने इससे असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायालय इस प्रकार के व्यापक एवं सर्वसमावेशी निर्देश नहीं दे सकता । दोनों न्यायमूर्तियों के मतभेद के कारण यह प्रकरण तीसरे न्यायमूर्ति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने हेतु मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया गया है ।

१. न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा कि जब किसी कार्यवाही का संबंध प्रथम दृष्टया किसी आपराधिक प्रकरण से प्रतीत होता है, तब प्रशासन को नगरपालिकाओं से संबंधित कानूनों का उपयोग करके तत्काल ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करनी चाहिए ।

२. दूसरी ओर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने भिन्न मत व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानकर चला जाता है कि सरकारी अधिकारी विधि के अनुसार कार्य करते हैं तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हैं । यदि किसी व्यक्ति को ध्वस्तीकरण की कार्यवाही से क्षति पहुंचती है, तो उसे राहत प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है । ध्वस्तीकरण पर २ वर्ष की निश्चित अवधि के लिए रोक निर्धारित करना वस्तुतः विधिक प्रक्रिया को स्थगित करने के समान होगा, तथा न्यायालय ऐसा नहीं कर सकता ।

प्रकरण क्या है ?

यह प्रकरण एक परिवार के तीन सदस्यों द्वारा प्रविष्ट की गई याचिका से संबंधित है । उनका आरोप है कि उनके एक रिश्तेदार के विरुद्ध ‘बालकों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO)’ तथा ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ के अंतर्गत प्रकरण दर्ज होने के पश्चात पुलिस एवं भीड ने मिलकर उनके मकान को निशाना बनाया ।