धर्मपरिवर्तन करने से जाति नहीं बदलती ।

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ का निर्णय ।

मुंबई – धर्मपरिवर्तन करने से जाति नहीं बदलती, ऐसा निर्णय मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने दिया । न्यायालय ने जाति प्रमाणपत्र पडताल समिति का आदेश निरस्त कर धर्मपरिवर्तन करने से व्यक्ति जिस जाति में जन्म लेता है, वह नहीं बदलती, ऐसा बताया ।

१. अमरावती की प्राची सुधीर नेटके (आयु २० वर्ष) इस एंजिनियरिंग की छात्रा ने ‘वाणी’, इस अन्य पिछडे (ओबीसी) प्रवर्ग की जातिवैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए याचिका प्रविष्ट की थी, परंतु उसके लिविंग सर्टिफिकेट में ‘सैतवाल जैन’, यह जाति प्रविष्ट होने का कारण बताते हुए मंडल जाति प्रमाणपत्र पडताल समिति ने उसका दावा निरस्त किया । समिति ने ‘जैन वाणी’इस जाति का राज्य की ओबीसी सूची में समावेश न होने का भी संदर्भ दिया था । इसके लिए प्राची नेटके उच्च न्यायालय पहुंची ।

२. न्यायाधीश उर्मिला जोशी-फालके एवं न्यायाधीश निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने इस प्रकरण की सुनवाई कर समिति का आदेश निरस्त किया । न्यायालय ने कहा कि विद्यालय के प्रमाणपत्र में धर्म के संबंध में उल्लेख को महत्त्व दिया गया तथा प्रमाणों की अनदेखी की गई ।

३. सतर्कता विभाग के ब्योरे में भी प्राची नेटके का परिवार ‘वाणी’ समुदाय का है, यह स्पष्ट हुआ था । ‘परिवार भले ही जैन धर्म का पालन करता हो, तब भी उनकी जन्म से चली आ रही जाति नहीं बदलती’, ऐसा न्यायालय ने रेखांकित किया । इसके उपरांत न्यायालय ने संबंधित समिति को ४ सप्ताह के अंदर प्राची नेटके को ‘वाणी’ समुदाय का जातिवैधता प्रमाणपत्र प्रदान करने का निर्देश दिया ।