गुजरात उच्च न्यायालय ने ३८ जिहादी आतंकवादियों की फांसी एवं ११ आरोपियों का आजीवन कारावास दंड अविचल रखा !

वर्ष २००८ के कर्णावती बम विस्फोटों का प्रकरण

कर्णावती (गुजरात) – २६ जुलाई २००८ को यहां निरंतर हुए २२ बम विस्फोटों के प्रकरण में विशेष कनिष्ट न्यायालय के चार वर्ष पुराने निर्णय को गुजरात उच्च न्यायालय ने अविचल रखा है । न्यायालय ने कुल ४९ दोषियों में से ३८ दोषियों की फांसी तथा शेष ११ का आजीवन कारावास का दंड स्थिर रखा है । न्यायमूर्ति ए. वाय. कोगजे एवं न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने वर्ष २०२२ में कनिष्ट न्यायालयके निर्णय के विरुद्ध प्रविष्ट याचिकाओऺ पर यह आदेश सुनाया । फांसी का दंड पाए लोगों में कम-से-कम १३ गुजरात के, ८ उत्तर प्रदेश के, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश के प्रत्येक ५-५ , केरल एवं कर्नाटक के प्रत्येक २-२ तथा भाग्यनगर के १ व्यक्ति संम्मिलित हैं ।

कर्णावती के सरकारी नागरिक चिकित्सालय, एल.जी. चिकित्सालय, वाहन, साइकिलें एवं चार पहिया वाहन सहित विभिन्न स्थानों पर २२ बम विस्फोट हुए थे । इनमें ५६ लोग मारे गए एवं लगभग २०० लोग घायल हुए थे । कुल २४ बमों में से कलोल एवं नरोडा में न फटे बम पाये गए थे ।

सरकारी पक्ष ने कहा था कि वर्ष २००२ में गोधरा दंगों के प्रतिशोध के रूप में तथा लोकतान्त्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को पलटने के उद्देश्य से दोषियों ने यह षड्यंत्र रचा था ।