किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता अथवा उसका विदेशी नाम उसकी हिन्दू धर्म के प्रति आस्था प्रमाणित नहीं कर सकता। – Madras High Court

अमेरिकी हिन्दू महिला लॉरा फ्रांसिस अय्यंगार को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से रोके जाने के प्रकरण में मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय ।

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चेन्नई (तमिलनाडू) – किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता अथवा उसका विदेशी नाम उसकी हिन्दू धर्म के प्रति आस्था प्रमाणित नहीं कर सकता । हिन्दू धर्म अत्यंत उदार धर्म है तथा उसका स्वीकार करने के लिए किसी भी औपचारिक समारोह की अथवा धर्मांतरण के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है, ऐसा निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय ने एक अभियोग में दिया है । हिन्दू धर्म अपनानेवाली अमेरिकी महिला लॉरा फ्रांसिस अय्यंगार को तमिलनाडू के तंजावर के श्री अरुलमिगु अभिष्ट वरदराजपेरुमाळ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से रोका गया था, क्योंकि प्रशासन ने उनके विदेशी नाम एवं अमेरिकी नागरिकता के कारण उन्हें ईसाई माना था ।

न्यायालय ने इस आदेश में न केवल उस महिला के अधिकारों को ही पुनर्संचयित नहीं किया, अपितु हिन्दू धर्म की व्यापकता, उदारता तथा उसके ऐतिहासिक स्वरूप पर भी महत्त्वपूर्ण भाष्य किया । न्यायालय ने सुस्पष्टता से कहा कि लॉरा ने संपूर्ण निष्ठा एवं आचरण के द्वारा हिन्दू धर्म का स्वीकार किया है; इसलिए उन्हें अन्य हिन्दू महिला श्रद्धालुओं की भांति ही मंदिर में पूजा-अर्चना करने का पूर्ण अधिकार है ।