Golden Triangle Scam : ‘गोल्डन ट्रायंगल’ में ८०० भारतीय बंधक : महाराष्ट्र के २५ युवक भी सम्मिलित

  • ‘सिविल सोसाइटी नेटवर्क फॉर ह्यूमन ट्रैफिकिंग विक्टिम असिस्टेंस’ संस्था की जानकारी

  • नौकरी का लालच देकर की गई ठगी

( AI निर्मित चित्र)

नई दिल्ली – थाईलैंड–म्यांमार सीमा पर स्थित कुख्यात ‘गोल्डन ट्रायंगल’ क्षेत्र में साइबर ठगों के अड्डों पर विभिन्न देशों के अनुमानित ५,३०० नागरिकों को बंधक बनाकर रखा गया है, जिनमें लगभग ८०० भारतीय नागरिक भी सम्मिलित हैं । इनमें महाराष्ट्र के कम-से-कम २५ युवक भी हैं । उन्हें बैंकॉक में अच्छे वेतनवाली नौकरी का लालच देकर वहां ले जाया गया था ।

‘सिविल सोसाइटी नेटवर्क फॉर ह्यूमन ट्रैफिकिंग विक्टिम असिस्टेंस’ संस्था के अनुसार, इन ५,३०० बंधकों में चीन के १,६०० नागरिक, म्यांमार के २००, थाईलैंड के २०, तथा फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया, ब्राजील, रूस, केन्या, युगांडा, रवांडा एवं जिम्बाब्वे के नागरिक भी सम्मिलित हैं ।

बंधकों की रिहाई के लिए केंद्र सरकार एवं महाराष्ट्र सरकार के प्रयास जारी

इन युवकों की मुक्ति (रिहाई) के लिए केंद्र सरकार तथा महाराष्ट्र सरकार ने प्रयास आरंभ कर दिए हैं । विदेश मंत्रालय तथा बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय किया जा रहा है । महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन, सांसद अशोक चव्हाण तथा पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे ने भी इस प्रकरण में पहल की है ।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, म्यांमार में ऐसे केंद्रों में १ लाख से अधिक लोगों को बलपूर्वक काम करने के लिए विवश किया जा रहा है । भारत ने पिछले डेढ-दो वर्षों में ऐसे केंद्रों से २,४०० से अधिक भारतीयों को मुक्त कराया है ।

‘गोल्डन ट्रायंगल’ क्या है ?

थाईलैंड, म्यांमार एवं लाओस – इन तीन देशों की सीमाएं जहां मिलती हैं, उस क्षेत्र को ‘गोल्डन ट्रायंगल’ कहा जाता है । यह क्षेत्र पहले अफीम तथा अन्य मादक पदार्थों के उत्पादन एवं तस्करी के लिए विश्वभर में कुख्यात था । वर्तमान में यहां मानव तस्करी, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधडी (साइबर स्कैम), अवैध कॉल सेंटर तथा सशस्त्र अपराधी गिरोहों का बडा नेटवर्क विकसित हो गया है । विदेशी युवकों को नौकरी का लालच देकर यहां लाया जाता है तथा उन्हें साइबर ठगी करने के लिए जबरदस्ती काम करने पर विवश किया जाता है । विरोध करनेवालों के साथ मारपीट की जाती है, उन्हें बिजली के झटके दिए जाते हैं तथा बंदूक दिखाकर धमकाया जाता है ।