संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत ने आतंकवाद के विषय पर सुनाई खरी-खरी ।

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – आतंकवाद के होनेवाले वित्तपोषण का सामना करना विश्व समुदाय के सामूहिक प्रयासों का भाग होना चाहिए । अंतर राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद का समर्थन करने हेतु किसी भी शिकायत का आधार लिए बिना इस ‘मारक विचारधारा को जड से उखाड फेंकने के लिए एकत्रित होकर काम करना चाहिए, ऐसा आवाहन भारत ने संयुक्त राष्ट्रों में किया ।
संयुक्त राष्ट्रों में भारत के स्थाई प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि भारत विगत अनेक दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार रहा है । इसके लिए हमने बहुत बडा मूल्य चुकाया है । आतंकवाद के कारण अनेक निर्दाेष लोगों के प्राणों का हरण हुआ, साथ ही परिवार ध्वस्त हुए। इन्हीं अनुभवों से भारत की यह भूमिका बन गई है कि आतंकवाद का किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं किया जा सकता । चाहे कोई भी शिकायत, राजनीतिक उद्देश्य अथवा नीतिगत समीकरण हों, तब भी आतंकवाद के सभी रूपों एवं पद्धतियों की बिना किसी संकोच से निंदा होनी चाहिए । सदस्य देशों को इसके संदर्भ में पूरा सहयोग करना चाहिए । अंतर राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद का सामना करते समय दोहरे मापदंड लगाना टालना चाहिए । आतंकवादी गतिविधियां चलानेवाले, उन्हें आर्थिक सहायता देनेवाले तथा उनके प्रायोजकों को उत्तरदायी मान कर उन्हें आरोपी के कटघरे में खडा करना अत्यंत आवश्यक है ।
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