वाशीम: ९ पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास !

  • वर्ष २०११ में पुलिस कारावास में हुई मारपीट में युवक की मृत्यु का प्रकरण

  • निर्दोष युवक पर मिथ्या परिवाद प्रविष्ट करने का आरोप

  • १५ वर्षों प्रदीर्घकाल के उपरांत आया न्यायिक निर्णय

वाशीम – यहां के जिला सत्र न्यायालय ने ९ पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास का दंड सुनाया है । वर्ष २०११ में पुलिस कारावास के समय हुई मारपीट में एक युवक की मृत्यु हो गई थी । इसी प्रकरण में १५ वर्ष, १ माह एवं २३ दिन के प्रदीर्घकाल के उपरांत वाशीम के जिला सत्र न्यायाधीश जयसिंह झपाटे ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया ।

१. ९ मई २०११ को रिसोड पुलिस चौकी के तत्कालीन थानाध्यक्ष महादेव माणिक धांडे सहित आठ पुलिसकर्मियों ने हिंगोली जिले के सेनगाव तालुका स्थित वढोणा की पारधी बस्ती पर छापा मारा था । उस समय बेग्या पवार नामक युवक को चोरी के संदेह में बंदी बनाया गया था । पुलिस द्वारा अपराध स्वीकार करने के लिए की गई पिटाई में उसकी मृत्यु हो गयी ।

२. इस प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण विभाग(सीबीआई) ने ३४ दिन की जांच के प्रदीर्घकाल के उपरांत हत्या एवं विशेष अत्याचार कानून (‘एट्रॉसिटी’) के अंतर्गत दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट किया था । अभी प्रदीर्घकाल के उपरांत १५ वर्षों में यह निर्णय सुनाया गया ।

३. बेग्या पवार के विरुद्ध पहले कोई आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट नहीं था । उसे केवल पारधी समुदाय का होने के कारण पुलिस ने कारावास में लिया था ।

आजीवन कारावास पाने वाले पुलिसकर्मियों के नाम :

रिसोड पुलिस के तत्कालीन थानाध्यक्ष महादेव माणिक धांडे सहित पुलिस कर्मचारी मदन पवार, शिवाजी खिल्लारी, पंजाब पाटकर, रमेश पवार, प्रकाश तारम, नागोराव खांडके, अशोक वैद्य एवं वसंत जाधव ये वे अपराधी पुलिसकर्मी हैं, जिन्हें आजीवन कारावास का दंड दिया गया है ।

 

संपादकीय भूमिका

वाशीम की इस घटना जैसे अन्य प्रकरणों में भी निर्दोषों को बिना कारण कारागृह में बंद करने उनके साथ अत्याचार करने वाले पुलिसकर्मियों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए !