Indra Nooyi : भारत की प्रगति मंद गति से ; परंतु वहां लोकतंत्र होना, यह एक अच्छी बात !

  • ‘पेप्सिको’ की पूर्व अध्यक्षा इंद्रा नुई ने की भारत की चीन से तुलना l

  • चीन द्वारा केंद्रीकृत प्रणाली अपनाने से हुई तीव्र प्रगति l

‘पेप्सिको’ की पूर्व अध्यक्षा इंद्रा नुई

नई दिल्ली – चीन को निर्धनता से बाहर निकालने वाली वहां की व्यवस्था का मैं आदर करती हूं । केंद्रीकृत पद्धति से कार्य करने के कारण ही वह वैश्विक महाशक्ति बन सका । भारत इसके विपरीत वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहा है ; क्योंकि यहां लोकतंत्र है तथा जब प्रत्येक व्यक्ति को मतदान का एवं अपनी बात रखने का अधिकार होता है, तब प्रगति का वेग मंद हो जाता है । तथापि परिस्थिति ऐसी है, इसका मुझे आनंद ही है, ऐसा वक्तव्य ‘पेप्सिको’ प्रतिष्ठान की पूर्व अध्यक्षा एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नुई ने किया । अमेरिका की पूर्व विदेश सचिव कोंडोलिजा राइस से संवाद करते समय ७० वर्षीय नुई ने यह वक्तव्य दिया ।

नुई ने कहा कि :

१. चीन द्वारा केंद्रीकृत प्रणाली अपनाने से वहां व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्थागत ‘नियंत्रण तथा संतुलन’ प्रणाली का अभाव है । इस भेद को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने भारत की न्यायपालिका के प्रत्यक्ष स्वरूप की ओर संकेत किया ।

२. अमेरिका के नगरों की भांति ही भारत के प्रत्येक बडे नगर में एक न्यायालय होता है । चीन में इसके विपरीत न्यायालय नहीं हैं ; क्योंकि वहां सरकार ही नियम बनाने वाली तथा निर्णय लेने वाली होती है तथा इसी कारण वहां समस्या उत्पन्न होती है । हमारी न्यायपालिका जो लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, वही उन्हें यह सांत्वना देती है कि, इस देश में उनके भी कुछ अधिकार हैं ।

(और इनकी सुनिए…) ‘भारत का सौंदर्य उसके कोलाहल में ही छिपा है !’ – नुई का भारत में पर्यटन पर वक्तव्य

नुई से राइस ने चीन की तुलना में भारत में पाश्चात्य पर्यटकों की दृष्टि से क्या भेद है, ऐसा पूछा । इस पर वे बोलीं कि, चीन तुलनात्मक रूप से एकसमान है, जिससे वहां आने वाले पर्यटकों के लिए भ्रमण करना सरल हो जाता है । इसके विपरीत भारत की मुख्य विशेषता है वहां का ‘कोलाहल तथा आपाधापी’ । भारत का सौंदर्य वहां के कोलाहल में ही छिपा है । जिन लोगों को इस देश का अभ्यास हो जाता है, उन्हें यहां की अप्रत्याशित वस्तुओं से अनुराग हो जाता है ।

वे आगे बोलीं कि, यह कोलाहल एक मादकता के समान है । आपको इसकी लत लग जाती है । उन्होंने भारत के मार्गों पर जीवन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वाहनों के साथ मार्गों पर गौमाता भी सर्वत्र देखने को मिलती हैं । ऐसे दृश्य प्रथम बार आने वाले तथा अनुशासित एवं स्वच्छ परिसर को प्रिय मानने वाले पर्यटकों को भ्रम में डाल सकते हैं ; परंतु अनेक भारतीयों के लिए ये बातें उनके दैनिक जीवन का एक भाग हैं । भारतीय लोग बहुधा ‘यह समय भी व्यतीत हो जाएगा’ ऐसी मानसिकता को स्वीकार करते हैं तथा इस अव्यवस्था को देश की सामाजिक संरचना का एक भाग मानते हैं ।

संपादकीय भूमिका

पर्यटन के माध्यम से भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने के लिए प्रयासरत है । ऐसे समय में नुई जैसी सफल भारतीय द्वारा इसके विपरीत वक्तव्य देना श्रेयस्कर नहीं है !