श्री प्रीतम नाचणकर, विशेष प्रतिनिधि, दैनिक सनातन प्रभात, मुंबई

मुंबई, २ जुलाई (वार्ता.) – वर्तमान समय सूचना-प्रौद्योगिकी का है । इसका महत्त्व ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल २०२६ से ‘सूचना एवं प्रौद्योगिकी’ इस स्वतंत्र विभाग की स्थापना की; परंतु अनेक वर्ष बीत जाने पर भी सूचना-प्रौद्योगिकी से संबंधित अनेक अंग्रेजी शब्दों के लिए वैकल्पिक मराठी पारिभाषिक कोश अस्तित्व में नहीं है । परिणामस्वरूप आज भी सरकार के दैनिक कामकाज में सूचना-प्रौद्योगिकी से संबंधित ‘डाउनलोड’, ‘अपलोड’, ‘फोल्डर’, ‘साइबर’ जैसे सैकडों अंग्रेजी शब्दों का खुले रूप से उपयोग किया जा रहा है । इस पारिभाषिक कोश का निर्माण होने पर सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विदेशी शब्दों के लिए मराठी भाषा के गुणवत्तापूर्ण शब्दों का उपयोग किया जा सकेगा । इससे मराठी भाषा और अधिक समृद्ध होगी । इसलिए इस पारिभाषिक कोश के निर्माण को मराठी भाषा विभाग अर्थात महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्राथमिकता देना अपेक्षित है ।
Sanatan Prabhat Exclusive | Maharashtra Has No Marathi IT Glossary!
Despite extensive use of information technology in government administration, Maharashtra has no standardised Marathi glossary for IT-related English terms.
Chhatrapati Shivaji Maharaj created the Rajyabhasha… pic.twitter.com/rPpTq3xeCc
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 2, 2026
आधुनिकता के कारण पिछले कुछ वर्षों में सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेक उपकरणों एवं सेवाओं का निर्माण हुआ है । यह निर्माण यूरोपीय देशों में हुआ होने के कारण उनके नाम अंग्रेजी में हैं । इस प्रौद्योगिकी का उपयोग भारत में भी आरंभ होने के उपरांत प्रत्येक राज्य के लिए उसके लिए अपनी-अपनी भाषा में वैकल्पिक शब्दों का निर्माण करना आवश्यक है; उसी प्रकार महाराष्ट्र में भी उसका मराठी में निर्माण होना आवश्यक है । इन शब्दों के लिए या तो वैकल्पिक मराठी शब्द अस्तित्व में ही नहीं हैं अथवा जो वैकल्पिक मराठी शब्द उपयोग किए जाते हैं, वे प्रचलित नहीं हैं । राज्य सरकार यदि ऐसे शब्दों का पारिभाषिक कोश तैयार करती है, तो उन शब्दों को राज्य मान्यता प्राप्त होगी तथा शासन के कामकाज में तथा कालांतर में समाज में भी ये मराठी शब्द प्रचलित होंगे ।

अब तक ३८ पारिभाषिक कोशों का निर्माण !
विभिन्न क्षेत्रों के शब्दों की सूची बनाकर ‘मराठी पारिभाषिक कोश’ का निर्माण करने का महत्त्वपूर्ण कार्य भाषा विभाग द्वारा किया जाता है । मराठी भाषा विभाग का यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण; परंतु उपेक्षित विभाग है । भारत के संविधान से लेकर विधानमंडल के कानून, विधेयक, राज्यपाल के भाषण आदि महत्त्वपूर्ण शासकीय अंग्रेजी लेखन का सरल और सुगम मराठी भाषा में अनुवाद करने का कार्य भाषा विभाग द्वारा किया जाता है । अब तक इस विभाग ने कृषिशास्त्र, रसायनशास्त्र, सांख्यिकी, ग्रंथालयशास्त्र, धातुशास्त्र, गणितशास्त्र, शिक्षाशास्त्र आदि विभिन्न क्षेत्रों के ३८ पारिभाषिक कोशों का निर्माण किया है ।
सरकारी कामकाज में सूचना-प्रौद्योगिकी से संबंधित अंग्रेजी शब्दों का खुले रूप से उपयोग !
हार्डवेयर, हार्डडिस्क, मदरबोर्ड, कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, ब्राउजर, डोमेन, वाई-फाई, हॉटस्पॉट, डाउनलोड, अपलोड, राउटर, एंटीवायरस, साइबर, फोल्डर, प्रॉम्प्ट, ईमेल, वीडियो कॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंन्स, क्यू.आर. कोड जैसे सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के सैकडों शब्द शासकीय कामकाज में उपयोग किए जा रहे हैं ।
पारिभाषिक कोश निर्माण का महत्त्व !हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना होने पर मराठी भाषा पर विदेशी भाषाओं का प्रभाव कम करने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘राज्यभाषा कोश’ का निर्माण किया । विनायक दामोदर सावरकर ने भी विदेशी शब्दों के लिए अनेक मराठी शब्दों का निर्माण किया । उनमें से महापौर, मुख्याध्यापक, पनडुब्बी, विधिवेत्ता, प्राध्यापक, बोलपट, अधोरेखित, मूल्य, कोषाध्यक्ष, अनुपस्थित, खोज, धन्यवाद, सोंगाड्या, पारितोषिक, अर्थसंकल्प, भत्ता, पटांगण आदि अनेक शब्द हम आज भी उपयोग करते हैं । महाराष्ट्र राज्य की स्थापना हुई, उस समय मराठी पर अंग्रेजी भाषा का प्रभाव था । राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण ने मराठी भाषा के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले शासकीय पदों के लिए मराठी शब्दों के निर्माण के निर्देश दिए । उसके पश्चात भाषा संचालनालय ने ‘पदनाम’ इस पारिभाषिक कोश का निर्माण किया । आधुनिक प्रौद्योगिकी से संबंधित शब्दों के लिए स्वदेशी शब्दों का निर्माण समय रहते नहीं किया गया, तो आने वाली पीढी पर विदेशी शब्दों का ही प्रभाव बना रहेगा । उन पर अपनी भाषा के संस्कार करने के लिए कई वर्ष लगेंगे । इसलिए उपर्युक्त महान व्यक्तियों द्वारा स्वदेशी शब्दों के निर्माण के लिए किए गए प्रयासों को आदर्श मानकर राज्य सरकार को आधुनिक शब्दों के लिए वैकल्पिक मराठी शब्दों के निर्माण को प्राथमिकता देना आवश्यक है । |
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