पुणे के ‘विबग्योर स्कूल’ में ईसाई कर्मचारी द्वारा हिन्दू छात्रा के धर्मांतरण का प्रयास !

विद्यालय प्रशासन द्वारा प्रकरण को दबाने का प्रयास !

पुणे – यहां के फुरसुंगी क्षेत्र स्थित ‘विबग्योर स्कूल’ में दसवीं कक्षा में अध्ययनरत एक हिन्दू छात्रा पर धार्मिक प्रभाव डालकर उसका धर्मांतरण करने का अत्यंत पीड़ादायक प्रकरण प्रकाश में आया है । सदैव की भांति विद्यालय प्रशासन ने इस संवेदनशील प्रकरण को दबाने का पूरा प्रयास किया; परंतु पीडित बालिका के अभिभावकों द्वारा ‘अभिभावक समूह’ (पेरेंट्स ग्रुप) पर आवाज उठाने के कारण ईसाई मिशनरियों का षड्यंत्र विफल हो गया । ‘डीसीएन न्यूज’ ने यह समाचार प्रसारित किया है ।

रुग्णता का अनुचित लाभ उठाकर ‘बाइबल’ की सीख !

शिकायतकर्ता अभिभावकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उनकी पुत्री जब कक्षा में थी, तब अकस्मात अस्वस्थता का अनुभव होने के कारण वह उपचार के लिए विद्यालय के ‘सिक बे’ (चिकित्सा कक्ष) में गई थी । उस समय वहां उपस्थित ईसाई कर्मचारी ने उसे प्राथमिक उपचार अथवा चिकित्सीय सहायता प्रदान करने के स्थान पर सीधे ईसाई धर्म, ईसा मसीह (यीशु) पर श्रद्धा तथा धर्मांतरण के विषय में बताना प्रारंभ कर दिया । उस कर्मचारी ने स्वयं हिन्दू धर्म त्यागकर ईसाई धर्म कैसे स्वीकार किया ? एवं चर्च जाने से उसके जीवन में कैसा परिवर्तन आया ?, यह विस्तारपूर्वक बताया । ‘यीशु से प्रार्थना करने पर तुम्हारी समस्त समस्याएं दूर हो जाएंगी’, ऐसा कहकर सुकोमल आयु की हिन्दू छात्रा को भ्रमित करने का योजनाबद्ध प्रयास किया गया ।

‘इस बात के विषय में घर पर माता को कुछ भी मत बताना’, ऐसी कठोर चेतावनी हिन्दू छात्रा को दी गई एवं एक ईसाई ‘यू-ट्यूब इन्फ्लुएंसर’ के चलचित्र (वीडियो) देखने का परामर्श देते हुए उस चैनल का नाम एक पर्ची पर लिखकर बालिका के हाथ में दे दिया ।

विद्यालय प्रशासन का पाखंड !

‘विबग्योर स्कूल’ प्रशासन ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है तथा ‘संबंधित कर्मचारी की आंतरिक जांच चल रही है’, ऐसा अस्पष्ट उत्तर दिया; परंतु अभिभावकों ने अब विद्यालय प्रशासन के समक्ष आधिकारिक शिकायत पंजीकृत कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है । (अंतरराष्ट्रीय तथा ‘कॉन्वेंट’ विद्यालयों में हिन्दू विद्यार्थियों का सुव्यवस्थित ढंग से ईसाईकरण करने एवं उनके मन में हिन्दू धर्म के प्रति हीनभावना उत्पन्न करने का षड्यंत्र विगत अनेक वर्षों से चल रहा है । ऐसे विद्यालयों की गहन जांच कर दोषियों को तत्काल कठोर दंड दिया जाना चाहिए । – संपादक)

संपादकीय भूमिका

ऐसे विद्यालयों की मान्यता निरस्त करें, जिससे भविष्य में कोई ऐसा कृत्य करने का साहस न कर सके !