चीन ने भारत के साथ लिपुलेख दर्रे के उपयोग संबंधी समझौता किस आधार पर किया ?

  • नेपाल का चीन से प्रश्न

  • “यह आप दोनों देशों के बीच का विषय है, इसे बातचीत से सुलझाइए !” – चीन का परामर्श

बीजिंग (चीन) – नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने यहां चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भेट की । इस समय खनाल ने कालापानी, लिम्पियाधुरा एवं लिपुलेख के सूत्र को उठाया । साथ ही उन्होंने भारत तथा चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के उपयोग को लेकर हुए समझौते पर प्रश्न उठाते हुए पूछा कि, “यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई तथा इसका स्वरूप क्या है ?”

इसके उत्तर में वांग यी ने कहा कि यह मूलतः भारत एवं नेपाल के बीच का विषय है तथा इसका समाधान बातचीत के माध्यम से ही होगा । इस प्रकार के सूत्रों को संबंधित देशों को राजनयिक वार्ता द्वारा सुलझाना चाहिए ।

भारत एवं चीन ने वर्ष २०२० में लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलास मानसरोवर यात्रा तथा सीमापार व्यापार को पुनः प्रारंभ करने पर सहमति व्यक्त की थी । इसके अंतर्गत दोनों देशों ने इस मार्ग का उपयोग तीर्थयात्रा और व्यापार के लिए करने का निर्णय लिया था ।

नेपाल ने उस समय इसका विरोध किया था । उसका कहना था कि लिपुलेख, कालापानी एवं लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र के भाग हैं । इसलिए उससे परामर्श किए बिना इस मार्ग के संबंध में कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता । इसके पश्चात नेपाल ने भारत एवं चीन दोनों देशों के समक्ष राजनयिक विरोध प्रविष्ट कराया था ।

विशेष बात यह है कि शिशिर खनाल ने कुछ दिन पूर्व ही में भारत यात्रा के समय यह सूत्र नहीं उठाया था । उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अन्य विषयों पर चर्चा की थी ।

संपादकीय भूमिका

नेपाल को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चीन ने उसकी बात का समर्थन नहीं किया । इससे स्पष्ट होता है कि चीन ने भी इस क्षेत्र पर नेपाल के दावे को स्वीकार नहीं किया है ।