कनाडा, अमेरिका एवं मेक्सिको में चल रही फुटबॉल विश्व कप प्रतियोगिता की घटना
‘मेइवाकू’ संस्कृति के कारण जापानी दर्शकों की विश्वभर में प्रशंसा
डैलस (अमेरिका) – सामाजिक उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध जापानी नागरिकों की अनुशासनप्रियता का अनुभव पूरे विश्व ने एक बार फिर कुछ ही दिनों पूर्व किया । वर्तमान में कनाडा, अमेरिका एवं मेक्सिको में चल रही फुटबॉल विश्व कप प्रतियोगिता में डैलस में नीदरलैंड्स के विरुद्ध मैच २-२ से बराबरी पर समाप्त होने के उपरांत जापानी दर्शकों ने स्टेडियम (दर्शक दीर्घा) में पडा कचरा स्वयं उठाकर पूरे क्षेत्र को साफ किया । उनकी इस पहल की विश्वभर में सराहना हो रही है ।
जापानी संस्कृति में किसी स्थान को जिस स्थिति में पाया जाए, उसे उसी प्रकार छोडकर जाने का सिद्धांत सिखाया जाता है । यह शिक्षा विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालय से ही दी जाती है । इसी संस्कार के कारण मैच समाप्त होने के पश्चात भी दर्शक स्टेडियम में रुके और कचरा उठाने लगे । जैसे ही उन्होंने सफाई आरंभ की, वहां उपस्थित अन्य दर्शकों ने जोरदार तालियों की गडगडाहट के साथ उनका सम्मान किया ।
‘मेइवाकू’ का अर्थ क्या है?
जापानी संस्कृति में ‘मेइवाकू’ एक महत्त्वपूर्ण अवधारणा है । इसका अर्थ है – ऐसा व्यवहार करना जिससे दूसरों को असुविधा या कष्ट न हो । सार्वजनिक स्थानों को गंदा छोडना अथवा दूसरों के लिए अतिरिक्त काम उत्पन्न करना, ‘मेइवाकू’ के सिद्धांतों के विरुद्ध माना जाता है ।
इस विषय पर एक जापानी युवती ने कहा,
“यह हमारी संस्कृति का ही एक भाग है । यह हमारे मेजबान देश एवं हमारे खिलाडियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी एक तरीका है । यहां आना हमारे लिए सम्मान की बात है । इसलिए सब कुछ अस्त-व्यस्त छोडकर जाना हमें उचित नहीं लगता ।”
पहले भी दिखाई दी है अनुशासनप्रियता
वर्ष २०२२ में कतर में आयोजित फुटबॉल विश्व कप के समय भी एक मैच के उपरांत जापानी नागरिकों ने स्टेडियम की सफाई करके पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया था । विशेष बात यह थी कि उस समय मैच कतर एवं इक्वाडोर के बीच खेला गया था । जापान की टीम मैदान में न होने के उपरांत भी, जापानी दर्शकों ने वहां पडा कचरा उठाया था ।
इसी प्रकार वर्ष २०१८ में रूस तथा वर्ष २०१४ में ब्राजील में आयोजित विश्व कप प्रतियोगिताओं में भी जापानी नागरिकों ने अपनी अनुशासनप्रियता एवं सामाजिक दायित्व का परिचय दिया था ।

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