(और इनकी सुनिए …) ‘मार्ग पर नमाज पढना अनुचित है, तो सभी त्योहारों के उत्सवों पर प्रतिबंध लगाइए !’ : AIMIM Asaduddin Owaisi

ए.आई.एम.आई.एम. (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की मांग

असदुद्दीन ओवैसी

नई देहली – यदि मार्ग पर नमाज पढना अनुचित माना जा रहा है, तो संविधान के अनुच्छेद २५ के अनुसार सभी धर्मों के धार्मिक कार्यों पर समान रूप से अर्थात मार्ग पर त्योहार मनाने पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, ऐसी मांग ए.आई.एम.आई.एम. (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन – अखिल भारतीय मुस्लिम एकता संघ) के प्रमुख सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने की । वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्ग पर नमाज पढने के विरोध के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बोल रहे थे । अनुच्छेद २५ धर्म स्वतंत्रता की एवं स्वयं के धर्म का पालन एवं प्रसार करने के अधिकार का आश्वासन देता है ।

ओवैसी ने कहा कि,

१. नमाज पढने पर लोगों की आपत्ति दोगलापन दर्शाती है । अन्य समुदायों की धार्मिक यात्राओं एवं सभाओं के विषय में इस प्रकार की चिंता क्यों व्यक्त नहीं की जाती ? (हिन्दुओं के प्रत्येक धार्मिक कार्यक्रम रीतसर अनुमति लेकर किए जाते हैं, जबकि मुसलमान कानून का उल्लंघन करते हैं, यह जगजाहिर है ! – संपादक)

२. मार्ग पर नमाज केवल शुक्रवार के दिन दोपहर में अथवा ईद के समय ही होती है, प्रतिदिन नहीं । (वर्ष के ३६५ दिनों में से एक दिन अपराध कर रहा हूं, तो अनुचित क्या है, ऐसा कहने जैसा यह वक्तव्य है ! – संपादक) भारत में प्रत्येक धर्म के त्योहार मार्ग पर ही मनाए जाते हैं, है न ? आप वह नहीं देखते; आप उसकी ओर आंखें मूंद लेते हैं ।

३. यदि आप कह रहे हैं कि, किसी के त्योहार के समय मांस की दुकानें बंद होनी चाहिए, तो रमजान के ३० दिनों के लिए मदिरा की दुकानें भी बंद करें । ३० दिनों के लिए मदिरा की दुकानें खोली न जाएं । (रमजान के समय जिहादी आतंकवादी कृत्य करते समय लव जिहाद, थूक जिहाद, लैंड जिहाद, चोरी, डकैती, दंगे आदि अपराध करते समय ओवैसी एवं उनके बंधुओं को उनके धर्म का स्मरण नहीं होता क्या ? – संपादक)

४. लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभाओं के भाषणों पर कोई आपत्ति नहीं होती; परंतु अजान एवं नमाज पर वे आपत्ति लेते हैं ।

५. जब-जब रमजान अथवा बकरीद जैसे मुसलमानों के बडे त्योहार निकट आते हैं, तब अजान एवं नमाज से संबंधित सूत्र जानबूझकर उपस्थित किए जाते हैं । अजान की समस्या, नमाज की समस्या ? अंततः आपको हुआ क्या है ? (हिन्दुओं की धार्मिक यात्राएं मस्जिदों के सामने से वाद्य बजाते हुए जाने पर मस्जिदों से जानबूझकर उन पर आक्रमण किए जाते हैं । उस विषय में ओवैसी क्यों नहीं बोलते ? – संपादक)

आपका द्वेष केवल मुसलमानों के लिए ही है !

हिन्दू त्योहारों के समय अंडे, मांस एवं चिकन की बिक्री पर लादे जानेवाले प्रतिबंधों पर प्रश्न उपस्थित करते हुए ओवैसी ने पूछा कि, यह किस प्रकार का कानून है ? आपका द्वेष केवल मुसलमानों के लिए है । आपका द्वेष स्पष्ट रूप से दिखाता है कि, आप इस धर्म के अनुयायियों को दबाकर उन्हें पीछे ढकेलने का प्रयास कर रहे हैं । आपको उन्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाना है । (पाकिस्तान, बांग्लादेश में हिन्दुओं के संदर्भ में क्या चल रहा है, इस पर ओवैसी क्यों नहीं बोलते ? अफगानिस्तान से हिन्दुओं को एवं सिखों को निष्कासित किया गया । इस पर भी ओवैसी क्यों नहीं बोलते ? मुसलमानों को भारत में द्वेष का सामना करना पड रहा हो, उन्हें यहां द्वितीय श्रेणी का लग रहा हो, तो वे इस्लामी देशों में चले जाएं । उन्हें यहां किसी ने भी रहने के लिए नहीं कहा है ! साथ ही भलाई का ठेका क्या हिन्दुओं ने ही ले रखा है क्या ? इस अच्छाई के कारण ही आज भारत खंडित हुआ है, यह सेक्युलर हिन्दुओं को भी नहीं भूलना चाहिए ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

  • ‘हम हिन्दुओं के साथ एकत्र नहीं रह सकते’, ऐसा कहकर लाखों हिन्दुओं की हत्या एवं हिन्दू महिलाओं पर अत्याचार करने के पश्चात मुसलमानों को भारत का विभाजन कर पाकिस्तान दिया गया । इसके उपरांत भी मोहनदास गांधी के कारण मुसलमान भारत में ही रहे एवं वे ही अब हिन्दुओं के त्योहार मार्ग पर न मनाए जाने की मांग कर रहे हैं । ऐसे लोगों को अब भारत से निकाल बाहर करने का समय आ गया है !
  • मार्ग पर नमाज पढने की मांग करनेवालों तथा मार्ग पर नमाज पढनेवालों को पकडकर भारत से निकाल बाहर करना ही अब आवश्यक हो गया है !