कोल्हापुर – पश्चिम महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ‘कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ अर्थात ‘गोकुल’ के कुछ उत्पादों ने ‘हलाल’ प्रमाणपत्र प्राप्त किया है । गोकुल के घी, मक्खन तथा दूध पाउडर जैसे उत्पादों के लिए यह प्रमाणपत्र लिया गया है । इस संदर्भ में सामाजिक माध्यमों पर प्रमाणपत्र की एक प्रति प्रसारित हुई है, जिसमें १९ मार्च २०२५ को प्रमाणपत्र लागू होने तथा १८ मार्च २०२८ तक मान्य होने की जानकारी दिखाई दे रही है । इस विषय को लेकर सामान्य हिन्दू ग्राहकों तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा तीव्र असन्तोष व्यक्त किया जा रहा है ।
‘Gokul’ Milk Producers’ Union receives Halal certification for various products!
It would not be suprising if Hindus boycotted the products of milk producers’ unions that take such decisions and actions to appease Muslims!#GokulMilk #BoycottHalalProducts
Film 🎥 Courtesy:… pic.twitter.com/qNjDMX9DHr— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 27, 2026
‘पूर्णतः शाकाहारी दुग्ध उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणपत्र की आवश्यकता ही क्या है ?’ ऐसा प्रश्न सामाजिक माध्यमों पर पूछा जा रहा है । विरोधकों का आरोप है कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ के पुत्र नावेद मुश्रीफ द्वारा ‘गोकुल’ के अध्यक्ष रहते हुए यह निर्णय लिया गया । (जब भारत सरकार की आधिकारिक संस्थाएं जैसे ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ तथा ‘खाद्य एवं औषध प्रशासन’ उत्पादों का प्रमाणीकरण करती हैं, तब अलग से ‘हलाल प्रमाणपत्र’ की आवश्यकता क्या है ? ऐसा भी प्रश्न उठाया जा रहा है – संपादक)
आखाती देशों में निर्यात हेतु प्रमाणपत्र – चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ
इस विषय पर पत्रकारों के प्रश्न का उत्तर देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा, “यह प्रमाणपत्र वर्ष २०२२ में ही लिया गया था । अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह एक तकनीकी एवं गुणवत्ता संबंधी मानक है । गोकुल का घी, मक्खन तथा दूध पाउडर बडी मात्रा में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, तुर्किये, जॉर्डन तथा सीरिया जैसे देशों में निर्यात किया जाता है । इन देशों के व्यापार नियमों के अनुसार ‘हलाल प्रमाणपत्र’ के बिना खाद्य उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए यह प्रमाणपत्र लिया गया है ।”
‘हलाल’ प्रमाणपत्र क्या होता है ?

इस्लाम के अनुसार ‘हलाल’ का अर्थ है जो वैध या अनुमत हो । पहले ‘हलाल’ केवल मांस तक सीमित था, किन्तु अब गृह उपयोग की वस्तुएं, औषधियां, सौंदर्य प्रसाधन आदि अनेक वस्तुओं के लिए भी ‘हलाल’ प्रमाणपत्र लिया जाता है । अर्थात् यह प्रमाणित किया जाता है कि संबंधित उत्पाद इस्लामी मानकों के अनुसार है । इसके लिए कुछ इस्लामी संस्थाएं कार्यरत हैं एवं उनके द्वारा स्वीकृत प्रमाणपत्र को ‘हलाल’ प्रमाणपत्र कहा जाता है ।
कुछ लोगों का मत है कि ‘हलाल’ प्रमाणन के माध्यम से अलग आर्थिक व्यवस्था को बढावा देने का प्रयास किया जा रहा है । वहीं समर्थकों का कहना है कि यह मुख्यतः मुस्लिम उपभोक्ताओं की धार्मिक आवश्यकताओं तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों को ध्यान में रखकर किया जाता है ।

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