(और इनकी सुनिए…) “मैं लोगों के मंदिर जाने के विरुद्ध नहीं, अपितु भेदभाव के विरोध में हूं !”– Udhayanidhi Stalin

सनातन को समाप्त करने वाले बयान पर देशभर में आलोचना होने के पश्चात उदयनिधि स्टालिन की हास्यास्पद सफाई !

उदयनिधि स्टालिन

चेन्नई (तमिलनाडु) – मेरे बयान का अनुचित अर्थ निकाला जा रहा है । मैं लोगों के मंदिर जाने के विरोध में नहीं हूं, अपितु वहां जाति के आधार पर होनेवाले भेदभाव के विरुद्ध हूं । उस विचारधारा को समाप्त होना चाहिए — ऐसी सफाई द्रमुक नेता एवं राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में दिए गए अपने बयान “भेदभाव करनेवाले सनातन को समाप्त किया जाना चाहिए” पर दी है । इस बयान को लेकर देशभर में उनकी आलोचना हुई थी ।

उदयनिधि ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि,

१. जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में कहा था कि “लोगों को बांटनेवाले सनातन का अंत होना चाहिए”, तब कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं; परंतु मैं ऐसी आलोचनाओं से डरनेवाला नहीं हूं ।

२. द्रविड आंदोलन हमेशा विरोध के माध्यम से आगे बढा है; इसलिए मैं केवल एक छोटी-सी बात स्पष्ट करना चाहता हूं । जब मैं कहता हूं कि “सनातन का अंत होना चाहिए”, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई मंदिर न जाए । इसका अर्थ यह है कि केवल मंदिरों में ही नहीं, अपितु समाज में भी सभी लोगों को समान अधिकार मिलने चाहिए । मैं उस विचारधारा के अंत की बात कर रहा हूं, जो लोगों को ऊंची एवं नीची जातियों में बांटती है । मैं वही विचार प्रस्तुत कर रहा हूं, जिनकी चर्चा पेरियार, आंबेडकर, अण्णा एवं करुणानिधी ने की थी । हम किसी की ईश्वर में आस्था के विरोध में नहीं हैं; लेकिन असमानता एवं शोषण का हम कडा विरोध करेंगे ।

 

संपादकीय भूमिका

  • यदि इस्लाम या ईसाई पंथ को समाप्त करने का बयान दिया गया होता, तो क्या उदयनिधि सफाई देने के लिए भी बचे होते ?, ऐसा प्रश्न उठ रहा है !
  • उदयनिधि पहले भी सनातन के विरोध में बयान दे चुके हैं, इसलिए उनकी मानसिकता विश्व के सामने स्पष्ट हो चुकी है । ऐसे में इस प्रकार की सफाई का कोई अर्थ नहीं है !