Bengal Elections : मुस्लिम बहुल जिलों में भाजपा के हिन्दू उम्मीदवार विजयी !

  • • कम से कम ५० प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद, मालदा एवं उत्तर दिनाजपुर जिलों में भाजपा के १८ उम्मीदवार जीते ।

  • • मुस्लिमों के वोटों के ध्रुवीकरण एवं विभाजन का भी मिला लाभ ।


कोलकाता (बंगाल) – वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार, जिस बंगाल राज्य में मुस्लिमों की जनसंख्या २४.६ प्रतिशत थी, आज १५ वर्षों के उपरांत उनकी संख्या कितनी बढ गई होगी, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है । ऐसे में पिछले १५ वर्षों से मुस्लिमों का घोर तुष्टीकरण करनेवाली तथा घुसपैठियों की समर्थक तृणमूल कांग्रेस का शासनकाल था । इसके उपरांत भी, भाजपा ने राज्य के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में केवल हिन्दू उम्मीदवारों को ही टिकट दिया । ५० प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादीवाले जिलों में भी भाजपा ने हिन्दू उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा, जिसका लाभ पार्टी को मिलता दिख रहा है । भाजपा के विजयी उम्मीदवार एवं प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी ने संकेत दिया है कि वे अपने नंदीग्राम क्षेत्र के हिन्दुओं के लिए ही कार्य करेंगे, जिसके पश्चात जनता को लगने लगा है कि अन्य नवनिर्वाचित विधायकों को भी वहां के हिन्दुओं के लिए कार्य करना चाहिए ।

१. वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा तथा उत्तर दिनाजपुर जिलों में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात क्रमशः ६६ प्रतिशत, ५१.२७ प्रतिशत एवं ४९.९२ प्रतिशत था । आज यह अनुपात अत्यधिक बढ गया होगा ।

२. इसके उपरांत भी, भाजपा ने इन एकसाथ वोटों की चिंता न करते हुए तीनों जिलों के सभी ४३ विधानसभा क्षेत्रों में केवल हिन्दू उम्मीदवारों को ही खडा किया ।

३. इन ३ मुस्लिम बहुल जिलों में भाजपा १८ सीटें जीतने में सफल रही, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल २० सीटों पर संतोष करना पडा । वर्ष २०२१ के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने ३५ सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को शेष ८ सीटें मिली थीं । इस बार भाजपा एवं तृणमूल के अलावा कांग्रेस को २, हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ को २ एवं माकपा (CPIM) को १ सीट पर जीत मिली ।

भाजपा की सफलता के पीछे के कारण !

भाजपा को मिली इस सफलता के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें से मुख्य इस प्रकार हैं :

१. जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम वोट सत्ता परिवर्तन करने में सक्षम हैं, वहां सभी प्रमुख दलों ने मुस्लिम उम्मीदवार ही उतारे थे; किंतु भाजपा ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया । इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर मुस्लिम मतों का विभाजन हो गया, जिसका सीधा लाभ भाजपा के हिन्दू उम्मीदवारों को मिला ।

२. मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा प्रक्रिया के कारण लाखों फर्जी मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटा दिए गए । इसका स्वाभाविक लाभ भाजपा को हुआ ।

३. इसके साथ ही अधिकांश स्थानों पर हिन्दू मतदाता एकजुट हुए तथा उन्होंने भाजपा के पक्ष में मतदान किया । स्वतंत्रता के उपरांत बंगाल में इस बार सर्वाधिक मतदान हुआ । राज्य में अब तक का अधिकतम मतदान लगभग ८४ प्रतिशत था, जो इस बार बढकर ९२.४७ प्रतिशत हो गया । इसका अर्थ है कि हिन्दुओं ने संगठित होकर मतदान किया, जिसका लाभ भाजपा को इन तीन जिलों में भी मिला ।

४. जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अत्यधिक है, वहां सभी प्रमुख दलों ने मुस्लिम उम्मीदवार खडे किए थे । ऐसे कुछ स्थानों पर भाजपा के हिन्दू उम्मीदवार तीसरे तथा कुछ जगहों पर चौथे स्थान पर भी रहे । उदाहरण के लिए, मालदा जिले के सुजापुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार अभिजीत रजक चौथे स्थान पर रहे, उन्हें २० सहस्र वोट मिले । ऐसा ही मुर्शिदाबाद जिले के भगवानगोला में हुआ, जहां भाजपा के भास्कर सरकार को २३ सहस्र वोट मिले लेकिन वे चौथे स्थान पर रहे । इसी तरह रानीनगर में राणाप्रताप सिंह रॉय (२२ सहस्र वोट) तथा डोमकल में भाजपा नेता नंदादुलाल पाल (१३ सहस्र वोट) चौथे स्थान पर रहे ।

आंकडों से समझें : मुस्लिम बहुल जिलों में भाजपा कैसे सफल रही ?

१. मुर्शिदाबाद : यहां के २२ निर्वाचन क्षेत्रों में से भाजपा ८ पर विजयी रही । इनमें मुर्शिदाबाद (३१ सहस्र), बुरवान (२२ सहस्र), बरहमपुर (१७ सहस्र), बेलडांगा (१३ सहस्र ), कंडी (१० सहस्र), जंगीपुर (१० सहस्र), खारीग्राम (९ सहस्र) और नबग्राम (६ सहस्र) समाहित हैं । (कोष्ठक में दी गई संख्या जीत का अंतर दर्शाती है) ।

२. मालदा : जिले की १२ में से ६ सीटों पर भाजपा को सफलता मिली । इंग्लिश बाजार (९४ सहस्र), हबीबपुर (७८ सहस्र), मालदा (५० सहस्र), बैष्णवनगर (४७ सहस्र), गजोले (३८ सहस्र) और माणिकचक (१४ सहस्र) में भाजपा उम्मीदवार जीते ।

३. उत्तर दिनाजपुर : यहां भी ९ में से ४ सीटों पर जनता ने भाजपा के हिन्दू उम्मीदवारों को चुना । इसमें कालियागंज (७६ सहस्र), रायगंज (५८ सहस्र), करणदिघी (२० सहस्र) और हेमताबद (१२ सहस्र) निर्वाचन क्षेत्र सम्मिलित हैं ।

संपादकीय भूमिका

बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ मुसलमानों की जनसंख्या बड़ी संख्या में है, वहाँ हिंदू उम्मीदवार खड़ा करके भाजपा ने एक प्रकार से यह अप्रत्यक्ष रूप से दिखा दिया है कि उसे हिंदुत्व का खुला समर्थन प्राप्त है। अब कश्मीर जैसी स्थिति की ओर बढ रहे बंगाल को पुनः ‘हिन्दुओं का बंगाल’ बनाने के लिए भाजपा को कमर कस लेनी चाहिए, ऐसी अपेक्षा है ! बंगाल की हिन्दू जनता के जनादेश का सम्मान किया जाएगा, ऐसा न केवल बंगाल, अपितु देशभर के हिन्दू समाज को लगता है !