अत्यधिक गरीबी एवं प्रत्येक स्थान पर युद्ध का प्रभाव, तदापि भी कुछ इस्लामी देशों में आत्महत्या की अनुपात कम !

नई दिल्ली – ग्रीनलैंड, दक्षिण कोरिया, स्वीडन एवं जापान जैसे समृद्ध देशों में आत्महत्या की अनुपात अत्यंत अधिक है । दूसरी ओर पाकिस्तान, सीरिया, लेबनॉन एवं फिलिस्तीन जैसे इस्लामी देशों में आत्महत्या की अनुपात अत्यल्प है ।

१. फिलिस्तीन में आत्महत्या की अनुपात अत्यल्प है । यह देश गरीबी एवं इजराइल के साथ युद्ध का सामना कर रहा है । वर्ष २०२१ में प्रति एक लाख लोगों में आत्महत्या का आंकड़ा केवल ०.७८ था ।

२. सीरिया गृहयुद्ध एवं सत्ता परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है । यहां आत्महत्या की अनुपात प्रति लाख केवल०.८९ है ।

३. लेबनॉन में भी गरीबी चरम पर है एवं यह देश भी युद्ध में फंसा हुआ है; तदापि भी यहां आत्महत्या की अनुपात प्रति लाख ०.९४ है ।

४. पाकिस्तान में भी अत्यंत गरीबी है, बढती महंगाई के होने पर भी वहां आत्महत्या की अनुपात अत्यल्प है ।

५. अफगानिस्तान में लोग गरीबी एवं कुपोषण से त्रस्त हैं । लंबे समय से युद्धग्रस्त होने के कारण वहां महंगाई एवं अनुद्योगिता (बेरोजगारी) है । इसके होने पर भी वहां आत्महत्या काअनुपात अत्यल्प है ।

इस्लाम में आत्महत्या निशिद्ध !

इस्लामी देशों में आत्महत्या का अनुपात अल्प होने का एक कारण यह है कि इस्लाम में स्वयं की हत्या को ‘हराम’ (निशिद्ध) माना जाता है । यही कारण है कि वहां आत्महत्या अल्प प्रमाण में होती है । विश्व के समृद्ध एवं विकसित देशों जैसे स्वीडन, बेल्जियम एवं ग्रीनलैंड में आत्महत्या की अनुपात अधिक है । इसका एक कारण इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता मिलना भी है ।

भारत में बड़ी संख्या में आत्महत्या !

भारत में आत्महत्या के संदर्भ में “राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो” (‘नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो)’ के २०२३ के आंकडों के अनुसार आत्महत्या की अनुपात १२.३० (प्रति १ लाख जनसंख्या) है । वर्ष २०२३ में कुल १,७१,४१८ लोगों ने आत्महत्या की । वर्ष २०२२ (१,७०,९२४ ) की तुलना में इसमें लगभग ०.२९ प्रतिशत वृद्धि हुई है ।

भारत में आत्महत्या के प्रमुख कारण

१. पारिवारिक समस्याएं : लगभग ३३% प्रकरणों में मुख्य कारण पाया गया है।

२. आरोग्य : १८% से अधिक लोग शारीरिक या मानसिक आरोग्य के कारण आत्महत्या करते हैं ।

३. विवाह से जुड़े मुद्दे : लगभग ५% प्रकरण।

४. नशे का सेवन : ६% से अधिक प्रकरण।

५. आर्थिक संकट (ऋण/गरीबी) : लगभग ४% से ७% प्रकरण।

६. छात्रों में आत्महत्या : लगभग ८% ।

१८ से ४५ वर्ष के युवा वयस्क भारत की कुल आत्महत्याओं में ६६% भागीदारी रखते हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है ।

संपादकीय भूमिका

  • इस्लाम में आत्महत्या को अयोग्य बताया गया है, इसलिए मुसलमान उसका पालन करते हैं; जबकि हिन्दू धर्म में भी आत्महत्या को पाप बताया गया है, तदापि धर्मशिक्षा के अभाव में हिन्दू आत्महत्या करते हैं !
  • इस्लाम में आत्महत्या वर्जित होने पर भी, धर्म के नाम पर जिहादी आतंकवादी आत्मघाती आक्रमणों के समय शरीर पर बम बांधकर दूसरों के साथ स्वयंको भी उडा देते हैं !