राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के विरुद्ध परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट !

नागपुर – ‘हमें हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए कहते हैं; परन्तु हम कहते हैं कि, भारत यह हिन्दू राष्ट्र ही है, उसे घोषित करने की आवश्यकता ही नहीं है’, ऐसा मार्गदर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवतजी ने कुछ दिनों पूर्व यहां के एक कार्यक्रम में किया था । इस प्रकरण में उनके विरुद्ध नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन मून ने पुलिस में लिखित परिवाद प्रविष्ट किया है । ‘सरसंघचालक का वक्तव्य यह संविधान के धर्मनिरपेक्षता, समानता, सर्वधर्मसमभाव एवं राष्ट्रीय एकात्मता इन मूलभूत तत्त्वों के विरुद्ध है । इससे समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण अथवा वैमनस्य निर्माण होने की संभावना है’, ऐसा परिवादकर्ता ने कहा है ।
Nagpur: Complaint filed against the Sarsanghchalak of the RSS
Claim: Calling India a Hindu Rashtra is “anti-constitutional.”
The Congress party altered the original Constitution written by Dr. Babasaheb Ambedkar to insert the words 'Secularism' and 'Socialism.'
Does the… pic.twitter.com/O27Jy3HRdz
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 3, 2026
परिवाद में आगे कहा गया है कि,
१. भारत को एक विशिष्ट धर्म से जोडने का प्रयत्न संविधान के धर्मनिरपेक्ष तत्त्वों से विसंगत है एवं स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान, संविधानिक मूल्य एवं लोकतन्त्र की मूलभूत आत्मा को धक्का पहुंचानेवाला है ।
२. भारत यह विविध धर्म, भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं का देश है एवं संविधान द्वारा दी गई ‘धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र’ यह संकल्पना देश की एकता की आधारशिला है ।
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