Karnataka CET Exam : ‘सीईटी’ परीक्षा में छात्राओं की नथ हटाना संभव न होने पर उनकी नाक पर पट्टियां चिपकाई गईं ।

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण की ओर से छात्रों , छात्राओं का मानसिक उत्पीडन ।

चिक्कमंगुलुरू (कर्नाकट) – कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण की ओर से (के.ई.ए.) ली जानेवाली वर्ष २०२६ की सामायिक प्रवेश परीक्षा आज से पूरे राज्य में आरंभ हुई है । परीक्षा के समय परिक्षार्थियों को धातु से बने आभूषण धारण करने पर प्रतिबंध होने के कारण कुछ परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने से पूर्व सैकडों छात्राओं को रोककर उनकी नथ एवं अन्य आभूषण हटाने के लिए कहे जाने की घटनाएं हुईं । चिक्कमंगुलुरू के ‘एम्.ई.एस्.’ महाविद्यालय में छात्राओं की नथ हटाना संभव न होने से परीक्षा केंद्र पर कार्यरत कर्मचारियों ने कुछ छात्रओं की नाक पर पट्टियां चिपकाईं । इसके कारण अभिभावकों ने अप्रसन्नता व्यक्त की । परीक्षा का तनाव तथा परीक्षा केंद्रों पर छात्राओं को इस विचित्र प्रसंग का सामना करना पडा, जिससे छात्राओं में कुछ समय तक भ्रम का वातावरण रहा ।

बल्लारी जिले में १० परीक्षा केंद्रों में ‘सीईटी’ परीक्षाएं चल रही हैं । परीक्षा से पूर्व केंद्र के कर्मचारियों ने छात्राओं को कानों में धारण किए हुए तथा अन्य आभूषण निकालने के लिए कहा । इसके अतिरिक्त गले में तथा हाथ में बंधे धागे भी हटाने पर बाध्य किया ।

बेंगलुरू में ‘सीईटी’ परीक्षा में छात्रों को ‘जनेऊ’ हटाने के लिए कहे जाने से विवाद।

पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘सीईटी’ परीक्षा में छात्रों को ‘जनेऊ’ हटाने के लिए कहे जाने पर विवाद हुआ । (इससे परीक्षा विभाग का केवल हिन्दुओं के प्रति द्वेष दिखाई देता है – संपादक) मडिवाळा के कृपानिधि महाविद्यालय में स्थित परीक्षा केंद्र में छात्रों को ‘जनेऊ’ हटाने के लिए कहे जाने का आरोप लग रहा है । इससे छात्रों के अभिभावकों ने धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारण विरोध करते हुए पुलिस थाने में शिकायत प्रविष्ट की ।

इस घटना के उपरांत शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा ‘सीईटी’के अधिकारी परीक्षा केंद्र पहुंचे । उन्होंने अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, तथापि ‘कृपानिधि महाविद्यालय में ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं’, यह आरोप लगाते हुए छात्रों के अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की ।

संपादकीय भूमिका

परीक्षा में नाक-कानों में धारण किए जानेवाले आभूषणों का कोई संबंध न होते हुए भी उन्हें हटाने के लिए कहना क्या मानसिक उत्पीडन नहीं है ?