येरवडा ( जिला पुणे) मानसिक चिकित्सालय के उपअधीक्षक हेतु आरक्षित शासकीय निवासस्थान में ‘चर्च’ चलाए जाने का रहस्योद्घाटन !

निर्धन रोगियों के संबंधियों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण !

पुणे – येरवडा स्थित प्रादेशिक मानसिक चिकित्सालय के उपअधीक्षक हेतु आरक्षित शासकीय निवासस्थान में प्रत्यक्षतः ‘चर्च’ चलाया जा रहा है । इस संपूर्ण प्रकरण में चिकित्सालय के अधीक्षक पर उत्तरदायी होने का आरोप सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगाया है । इस स्थान पर केवल प्रार्थना सभाएं ही नहीं हो रही हैं, अपितु राज्य के कोने-कोने से आए निर्धन रोगियों के परिजनों को आर्थिक तथा भावनात्मक प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण किया जा रहा है, ऐसा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया किया है । ‘आपका रोगी स्वस्थ कर दिया जाएगा’, ‘आपके बच्चों की शिक्षा निःशुल्क करेंगे’, ‘आपको नौकरी दिला देंगे’, ऐसे प्रलोभन दिए जा रहे हैं ।

सामाजिक कार्यकर्ता शशिकांत साटोटे ने बताया कि १३८ एकड भूमि का स्वामित्व होते हुए भी अधीक्षक की नाक के नीचे शासकीय बंगले में ‘चर्च’ चलाया जाता है तथा वहां धर्मांतरण का जाल बुना जाता है, यह विषय अत्यंत गंभीर है । इस संपूर्ण प्रकरण की तत्काल जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाए ।

येरवडा प्रादेशिक मानसिक चिकित्सालय के प्रभारी अधीक्षक श्रीनिवास कोलोड ने बताया कि उक्त स्थान पर प्रार्थना स्थल चलाए जाने की भनक हमें ३-४ मास पूर्व लगी थी । (तो इतने दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं की ? – संपादक) इस विषय में संबंधित व्यक्ति को समझ (चेतावनी) भी दी गई थी । उक्त व्यक्ति मानसिक चिकित्सालय का कर्मचारी है तथा गत १५ से १६ वर्षों से वह वहां रह रहा है । यदि ऐसा कुछ घटित हो रहा है, तो उक्त बंगला खाली करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी । (शासकीय संपत्ति का दुरुपयोग होते समय प्रशासन संबंधितों को केवल चेतावनी देकर छोड देता है, इससे क्या प्रशासन का इस प्रकार को मूक समर्थन है ?, ऐसी शंका होती है । १५ से १६ वर्षों से वहां रहने वाला कर्मचारी यदि ऐसा अनधिकृत कृत्य कर रहा है, तो अब तक उस पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? – संपादक)

संपादकीय भूमिका

यह हिन्दुओं के धर्मांतरण का भयानक षड्यंत्र है ! ऐस लोगो के विरुद्ध तत्काल दांडिक अभियोग (फौजदारी मामले) पंजीकृत कर कठोर वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा शासकीय संपत्ति भी सुरक्षित नहीं रहेगी, यही इससे स्पष्ट होता है ।