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वाशिंगटन (अमेरिका) – पाकिस्तान को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक समीपस्त सहयोगी माना जाना चाहिए । चीन को ईरान में वर्तमान सरकार को बनाए रखने में रुचि है, क्योंकि वह ईरान से बडे पैमाने पर तेल का क्रय करता है । इसी कारण चीन ईरान को आर्थिक रूप से सशक्त बनाए रखता है । इस कारण से पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता का प्रस्ताव पूरी तरह निष्पक्ष नहीं माना जा सकता एवं इसके पीछे कुछ छिपे हुए उद्देश्य हो सकते हैं । इन सभी तथ्यों के आधार पर पाकिस्तान की भूमिका को चीन की रणनीति से विलग नहीं किया जा सकता, ऐसा मत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच.आर. मैकमास्टर ने एक साक्षात्कार में व्यक्त किया । उन्होंने शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए, जिससे उसके ध्येय पर पुन: से संदेह व्यक्त किया जा रहा है ।
पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों का उपयोग अपनी विदेश नीति के सहायक के रूप में करता है !
इस साक्षात्कार में मैकमास्टर ने आगे कहा कि पाकिस्तान एक ओर आतंकवाद विरोधी सहयोग की बातें करता है, जबकि दूसरी ओर अमेरिका के विरुद्ध षड्यंत्र करने वाले कुछ समूहों को समर्थन देता है । वर्ष १९४० के दशक के उत्तरार्ध से ही पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों का उपयोग अपनी विदेश नीति के एक सहायक के रूप में करता आ रहा है ।
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