
काठमांडू (नेपाल) – नेपाल सरकार ने पिछले दो दशकों में सत्ता में रहे प्रमुख नेताओं तथा वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक आयोग गठित करने की घोषणा की है । बढते भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच यह निर्णय लिया गया है । इस अवधि में नेपाली कांग्रेस तथा सी.पी.एन.-यू.एम.एल. जैसे दल सत्ता में रहे । इन दलों के नेताओं पर सत्ता का दुरुपयोग कर बडी मात्रा में संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं । पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, के.पी. शर्मा ओली एवं पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के विरुद्ध भी आर्थिक अनियमितताओं से संबंधित मामलों की जांच चल रही है ।
यह निर्णय प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की नई सरकार की १०० सूत्रीय सुधार योजना का हिस्सा है । पहले चरण में वर्ष २००६ से २०२६ तक के मामलों की जांच की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में १९९२ से २००६ के बीच की घटनाओं की समीक्षा की जाएगी ।
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नेपाल सरकार के नए नियम के अनुसार, भारत से १०० रुपये से अधिक मूल्य का कोई भी सामान नेपाल में ले जाने पर ‘भंसार’ (सीमा शुल्क) देना अनिवार्य होगा । दाल, तेल, चीनी, सब्जियां जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी ५ % से ८०% तक शुल्क लगाया जा सकता है ।
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