राष्ट्रीय वारकरी परिषद के अध्यक्ष ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने-शास्त्री का वक्तव्य ।

पंढरपुर – शरद पवार जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने परंपरा के अनुसार श्री विठ्ठल की सरकारी पूजा नहीं की । उस समय पत्रकारों ने जब उनसे यह पूछा कि आपको श्री विठ्ठल की पूजा करनी ही नहीं थी, तब आप पंढरपुर क्यों आए ? उस समय नास्तिकतावादी शरद पवार ने ‘मैं कार्यकर्ताओं से मिलने आया हूं, ऐसा उत्तर दिया । उन्होंने अपने मुख्यमंत्रीपद के कार्यकाल में श्री विठ्ठल की सरकारी पूजा करने से मना कर श्रीविठ्ठल एवं वारकरियों का अनादर किया है । ऐसे नास्तिकतावादी शरद पवार ने वारकरी संप्रदाय के विषय में बोलने का अधिकार गंवा दिया है, ऐसा प्रतिपादन ‘राष्ट्रीय वारकरी परिषद’ के अध्यक्ष ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने-शास्त्री ने विज्ञप्ति प्रकाशित कर किया ।
१. पुणे के नास्तिकतावादी सम्मेलन में जब डॉ. मुग्धा कर्णिक ने ‘वारकरी एवं श्री विठ्ठल कालबाह्य हुए हैं, ऐसा बोला था, तब पवार मौन क्यों रहे ? छगन भुजबळ जब हिन्दूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहब ठाकरे के साथ थे, तब वे हिन्दुत्वनिष्ठ थे, परंतु जब वे पवार के साथ गए, तब वे ‘विद्यालयों से श्री सरस्वतीदेवी के फोटो हटाएं, ऐसा हिन्दू धर्मविरोधी वक्तव्य देने लगे ।
२. वारकरी संप्रदाय के वेदांताचार्य वैकुंठवासी गुरुवर्य निवृत्ती महाराज वक्ते बाबा सदैव कहते थे, ‘वारकरी पहले हिन्दू है तथा उसके उपरांत वह वारकरी है ।’
३. सहस्रों वर्षाें में हिन्दुओं पर अनेक आक्रांताओं ने आक्रमण किए, परंतु वारकरी संप्रदाय के संतों ने डच, पोर्तुगीज, अंग्रेज, मुसलमान नास्तिकतावादी इत्यादि लोगों का षड्यंत्र नाकाम करने का कार्य किया । अनेक जातियों में संत उत्पन्न हुए तथा वारकरी संतों ने हिन्दू धर्म का महत्त्व बढाने का महान कार्य किया है ।
४. शरद पवार ने उनके कार्यकाल में वारकरी संप्रदाय में आधुनिकतावादी वारकरियों को घुसाने का षड्यंत्र कर देखा; परंतु वैकुंठवासी गुरुवर निवृत्ती महाराज वक्ते बाबा एवं वारकरियों ने उनका यह षड्यंत्र निष्फल किया । अतः शरद पवारसाहब, हम सार्वजनिकरूप से आपकी कडी निंदा करते हुए यह बता रहे हैं कि आप वारकरियों के विषय में बोल रहे हों, तो सावधान, क्योंकि वारकरियों के विषय में बोलने का अधिकार कब का गंवा दिया है ।
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