(और इनकी सुनिए…) ‘महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को हिन्दुत्व की परिभाषा सिखाने वाले सावरकर भी नास्तिक ही थे !’– Sachin Sawant

  • कांग्रेस नेता सचिन सावंत का संतापजनक वक्तव्य

  • वारकरी संप्रदाय में फूट डालने वाला वक्तव्य देने वाले शरद पवार का कांग्रेस द्वारा समर्थन

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वीर सावरकर, कांग्रेस के महासचिव सचिन सावंत

मुंबई – वारकरी संप्रदाय में ‘प्रतिगामी’ विचारों के लोगों ने प्रवेश किया है, ऐसा वक्तव्य देकर हिन्दू समाज में फूट डालने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पक्ष के अध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद शरद पवार का कांग्रेस ने समर्थन किया है । ‘हिन्दू धर्म में नास्तिकता मान्य है, साथ ही मुख्यमंत्री को हिन्दुत्व की परिभाषा सिखाने वाले सावरकर भी नास्तिक ही थे’, ऐसा विष वमन कर कांग्रेस के महासचिव सचिन सावंत ने हिन्दुत्व का अपमान करने का प्रयास किया है । सोशल मीडिया पर उन्होंने यह मत व्यक्त किया । (वीर सावरकर ने विज्ञान-आधारित हिन्दुत्व का पुरस्कार किया; परंतु उन्होंने हिन्दू धर्म का कभी त्याग नहीं किया । कांग्रेस ने केवल राजनीति के लिए उन्हें ‘नास्तिक’ ठहराकर हिन्दुओं की श्रद्धा के साथ खिलवाड किया है ! – संपादक)

सचिन सावंत ने कहा कि, शरद पवार के मत से हम पूर्णतः सहमत हैं । संघ के विचारों के ढोंगी बाबा, तथाकथित स्वयंघोषित आचार्य तथा विद्वेषपूर्ण विचारधारा फैलाने वाले कीर्तनकारों के माध्यम से वारकरी संप्रदाय में घुसपैठ करने का प्रयास किया जा रहा है । (शरद पवार द्वारा वारकरी संप्रदाय के कीर्तनकारों की सूची बनाने का वक्तव्य देना तथा कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करना, यह वारकरी आंदोलन में फूट डालने का ही प्रयास है । संतों के अभंगों से समाज प्रबोधन करने वाले कीर्तनकारों को ‘ढोंगी’ अथवा ‘घुसपैठिया’ कहना, यह संपूर्ण वारकरी संप्रदाय का अपमान है ! – संपादक)

  •  कांग्रेस का यह प्रयास ‘ उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जैसा ही है । स्वयं को ‘नास्तिक’ कहने वाले अथवा हिन्दू धर्म का सुविधानुसार उपयोग करने वाले लोग जब सावरकरजी के विचारों का आधार लेते हैं, तब उसके पीछे का हेतु हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण रोकना ही होता है । सावरकरजी को ‘नास्तिक’ सिद्ध करने की अपेक्षा कांग्रेस सावरकर के ‘अखंड हिन्दुस्थान’ तथा ‘जातिभेद उन्मूलन’ के विचारों को स्वीकार करने का साहस दिखाए !
  •  हिन्दू धर्म ने ‘चार्वाक’ दर्शन जैसे नास्तिक विचारों को भी स्थान दिया है, यह सत्य होने पर भी, वह उदारवाद ‘अधर्म’ फैलाने के लिए नहीं है । जिस कांग्रेस ने न्यायालय में ‘श्रीराम’ को काल्पनिक होने का शपथपत्र दिया, जिन्होंने ‘हिन्दू आतंकवाद’ का पाखंड जन्माया, उनके द्वारा हिन्दू धर्म में नास्तिकता का उदाहरण देना हास्यास्पद है । शरद पवार जैसे नेताओं को जब वारकरी संप्रदाय का भक्ति मार्ग ‘धर्मांध’ प्रतीत होता है, तब कांग्रेस को संप्रदाय की समानता स्मरण होती है; परंतु जब हिन्दुत्व पर आघात होते हैं, तब यही लोग मौन रहते है !