
नई दिल्ली – इजराइली मीडिया ‘केएएएन’ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप २८ मार्च को ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा कर सकते हैं; यद्यपि यह संभावना इजराइल के लिए सबसे बडी चिंता बन गई है । इस संभावित स्थिति की दृष्टि से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें युद्ध के अंतिम उद्देश्यों की शीघ्र आपूर्ति करने की रणनीति तय की गई । संभावित युद्धविराम से पहले ईरान के हथियार भंडार एवं सैन्य ढांचे को बडी क्षति पहुंचाने के निर्देश नेतन्याहू ने सेना को दिए हैं, ऐसे समाचार है ।
इजराइल का मानना है कि वर्तमान में सैन्य बढत दृढ करने का अवसर है तथा इसलिए आक्रमणों की तीव्रता बढा दी गई है । दूसरी ओर, अमेरिका एवं इजराइल के मध्य समन्वय दृढ बना हुआ बताया जा रहा है । आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए अमेरिका के सेंट्रल कमांड प्रमुख के इजराइल दौरे की संभावना है ।
ट्रंप की शीघ्र युद्ध समाप्त करने की इच्छा
जहां एक ओर २८ मार्च को युद्धविराम की घोषणा की संभावना जताई जा रही है, वहीं ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कुछ दिन पूर्व ही अपने सहयोगियों से कहा है कि वे ईरान के साथ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से दूर रहना चाहते हैं । उन्होंने आशा जताई है कि आनेवाले कुछ सप्ताह में यह संघर्ष समाप्त हो सकता है । यह भी बताया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चीन दौरे से पहले इस संघर्ष को समाप्त करना चाहते हैं ।
ईरान की भूमिका
इन सभी घटनाक्रमों के बीच ईरान का विचार कठोर बना हुआ है । ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका द्वारा दिया गया १५ सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव तेहरान ने निरस्त कर दिया है । पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव को भी ईरान ने स्वीकार नहीं किया । ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह युद्ध समाप्त करने का निर्णय अपनी शर्तों पर ही करेगा । इसलिए वर्तमान में किसी भी समझौते की संभावना बहुत कम दिखाई दे रही है ।
भारत ने कई वर्षों उपरांत ईरान से एलपीजी गैस खरीदना आरंभ किया
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को ३० दिनों के लिए हटाने के पश्चात भारत ने कई वर्षों में पहली बार ईरान से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खरीद आरंभ की है । पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण भारत ने वर्ष २०१९ में ईरान से कच्चे तेल एवं गैस का आयात बंद कर दिया था । ईरान से एलपीजी लेकर आनेवाला प्रतिबंधित जहाज ‘अरोरा’ मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है । यह गैस एक व्यापारी के माध्यम से खरीदी गई है एवं इसका भुगतान रुपये में किया जाएगा ।
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