Hijab Fatwa Imambara : इमामबाड़े में अब अ-मुस्लिम महिलाओं को भी हिजाब (पहचान छुपाने का वस्त्र) पहनना अनिवार्य !

  • लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) में तालिबानी धार्मिक आदेश

  • हिजाब (पहचान छुपाने का वस्त्र) न पहनने पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा

  • स्थानीय जिलाधिकारी ने आदेश को स्वीकृति दी

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – यहाँ के ऐतिहासिक इमामबाडे में अब महिलाओं को माथा ढककर, यानी हिजाब (पहचान छुपाने का वस्त्र) पहनकर ही प्रवेश मिलेगा । अन्यथा प्रवेश नहीं दिया जाएगा । इमामबाडा प्रशासन ने यह निर्णय लिया है । इसके लिए उनका तर्क है कि “यह धार्मिक स्थान है, इसलिए यहां इस्लाम के नियमों का पालन होना चाहिए ।”

दूसरी ओर मुस्लिम एवं हिन्दू महिलाओं का कहना है कि मस्जिद में जाते समय माथा ढकना समझ में आता है, किन्तु इमामबाडे में मस्जिद के अतिरिक्त भी कई स्थान हैं जहां बडी संख्या में पर्यटक आते हैं । यह हमारे ‘स्वतंत्रता के अधिकार’ का उल्लंघन है ।

प्रमुख बिंदु

१. ‘हुसैनी टाइगर्स’ नामक एक मुस्लिम संगठन की कई वर्षों की मांग के उपरांत हुसैनाबाद ट्रस्ट के सचिव एवं अतिरिक्त जिलाधिकारी (पश्चिम) एच. पी. शाही ने इसे अनुमति दी ।

२. उपजिलाधिकारी का कहना है कि बडा इमामबाडा शिया समुदाय का धार्मिक स्थल है, इसलिए उनकी मांग के अनुसार महिलाओं के लिए माथा ढकना आवश्यक किया गया है ।

३. यहां आने वाले पर्यटकों को माथा ढकने के लिए ओढनी उपलब्ध कराई जाएगी ।

४. शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने इस निर्णय का समर्थन किया है । उनका कहना है कि हर धार्मिक स्थल के अपने नियम होते हैं एवं हिजाब (पहचान छुपाने का वस्त्र) के बिना प्रवेश रोकने का हमें पूरा अधिकार है ।

हिन्दू युवतियों को कडवा अनुभव

इमामबाडा देखने गई कुछ हिन्दू युवतियों ने आरोप लगाया कि वहां उपस्थित “डेथ टू अमेरिका एंड इजराइल” लिखे फलकों को लात मारने के लिए उनसे कहा गया । साथ ही उन्हें हिजाब (पहचान छुपाने का वस्त्र) पहने बिना प्रवेश नहीं दिया गया । कई महिला संगठनों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि इमामबाडा केवल धार्मिक स्थल ही नहीं अपितु एक पर्यटन स्थल भी है, जहां मस्जिद के अतिरिक्त भी अनेक दर्शनीय स्थल हैं।

कार्यकर्ता रेणू मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार या उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर यह निर्णय रोकना चाहिए । इस प्रकार के निर्णय महिलाओं को मध्ययुगीन काल में ले जाने वाले हैं एवं भारतीय संविधान इसकी अनुमति नहीं देता ।

संपादकीय भूमिका 

  • ऐसे धार्मिक आदेश (फ़तवे) घोषित होने के लिए यह न पाकिस्तान है एवं न ही कांग्रेस शासन वाला कर्नाटक राज्य ! उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से अपेक्षा है कि ऐसे धार्मिक आदेश निर्गमित करने वालों एवं उन्हें अनुमति देने वाले जिलाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करे ।
  • अन्य समय धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध बोलने वाले तथाकथित प्रगतिशील लोग अब चुप क्यों हैं ? क्या उनकी यह दोहरी भूमिका दर्शाती है कि उनका “धार्मिक स्वतंत्रता” का विषय केवल एक नाटक है एवं वे केवल हिन्दुओं के विरुद्ध बोलने का अवसर ढूंढ़ते रहते हैं ?