….तो नाटो का भविष्य अंधकारमय ! – Donald Trump

युद्ध के १७ वें दिन हताश हुए डोनाल्ड ट्रम्प की दबाव की राजनीति जारी !

वॉशिंगटन / तेल अवीव / तेहरान – युद्ध आरंभ हुए १७ दिन हो चुके हैं । ऐसे में अमेरिका ने अब ‘नाटो’ के सदस्य देशों को चेतावनी देते हुए युद्ध में सहभागी होने के लिए दबाव बनाना आरंभ कर दिया है । हताश हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ‘नाटो’ के देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खुलवाने के काम में अमेरिका की सहायता नहीं की, तो ‘नाटो’ का भविष्य अंधकारमय होगा । ईरान के विरुद्ध संघर्ष में यदि यूरोपीय देश अमेरिका का समर्थन करने में असफल रहे, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड सकते हैं ।

चीन को भी ट्रम्प की चेतावनी !

ट्रम्प ने चीन को भी चेतावनी दी है । उन्होंने कहा कि यदि चीन ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में सहायता नहीं की, तो वे इस माह के अंत में चीन के राष्ट्रपति शी जीनपिंग के साथ होनेवाली शिखर बैठक को स्थगित कर सकते हैं । ट्रम्प ३१ मार्च को चीन जाने वाले हैं ।

पोप लियो ने युद्ध रोकने का किया अनुरोध !

पोप लियो

ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो (१४ वे) ने अनुरोध किया कि मध्य-पूर्व की स्थिति भयावह है अतः युद्ध तुरंत रोका जाना चाहिए । सभी को हिंसा रोककर संवाद आरंभ करना चाहिए । विद्यालयों, चिकित्सालयों एवं घरों पर हुए आक्रमणों में जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है, उनके प्रति मैं शोक व्यक्त करता हूं ।

सहस्रों ईरानी नागरिक पडोसी देशों अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान पहुंचे ! – संयुक्त राष्ट्र

ईरान के सहस्रों लोगों ने देश छोडकर पलायन किया है । वे पडोसी अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में शरण ले रहे हैं ।

ईरान के अनेक शहरों में घर एवं अन्य आवश्यक सेवाएं नष्ट (बर्वाद) हो गई हैं, जिसके कारण लोगों को सुरक्षा की खोज में देश छोडना पड रहा है । इनमें से लगभग ३२ सहस्र लोग अफगानिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग ४ सहस्र लोग पाकिस्तान पहुंचे हैं, ऐसी जानकारी यूनाईटेड नैशन ने दी है ।

ट्रम्प के अनुरोध को जापान एवं ऑस्ट्रेलिया ने ठुकराया !

हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति नियंत्रित करने एवं ईरान से संघर्ष करने के लिए ट्रम्प ने मित्र देशों से अपनी युद्धनौकाएं भेजने की अपील की थी । इस पर जापान एवं ऑस्ट्रेलिया ने इस अपील को ठुकरा दिया है ।

१. ऑस्ट्रेलिया : अमेरिका के दबाव को नकारते हुए ऑस्ट्रेलिया की नौसेना ने स्पष्ट किया है कि “युद्धनौकाएं भेजने की कोई योजना नहीं है ।” कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने कहा कि यह मार्ग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है; किंतु ऑस्ट्रेलिया को कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है । वर्तमान में वहां सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है ।

२. जापान : जापान ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए किसी भी सैन्य कार्रवाई को हमने अनुमति नहीं दी है । जापानी संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि युद्धनौकाएं भेजने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है तथा जापान कानूनी के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकता है ।

३. दक्षिण कोरिया : दशिण कोरिया ने सावधानीपूर्ण विचार अपनाते हुए कहा कि अमेरिका से चर्चा चल रही है तथा किसी भी निर्णय से पहले स्थिति का गहन आकलन किया जाएगा ।

४. ब्रिटेन : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने वैश्विक समुद्री यातायात में बाधाएं कम करने के लिए जलडमरूमध्य को पुनः खोलने के विषय में ट्रम्प से चर्चा की है ।

नेतन्याहू ने जीवित होने का वीडियो जारी किया !

बेंजामिन नेतन्याहू

बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के आक्रमण में मारे गए हैं, ऐसी अफवाहें फैल रही थीं । ईरानी एवं पाकिस्तानी मीडिया में यह समाचार प्रसारित किए गए थे । इसी बीच भारत के पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी सोशल मीडिया पर नेतन्याहू के ठिकाने की जानकारी प्रसारित की है, ऐसा असत्य दावा किया गया था ।

इन सभी अफवाहों पर विराम लगाते हुए नेतन्याहू ने स्वयं का एक वीडियो जारी किया । उन्होंने तेल अवीव के एक कॉफी शॉप में हंसते-मुस्कराते हुए अपना वीडियो प्रसारित किया । इससे उन्होंने सभी अफवाहों का सीधे उपहास उडाया ।

नेतन्याहू ने कहा, “इजराइली जनता का समर्थन मुझे, सरकार को, इजराइली रक्षा बलों को, मोसाद को एवं हमारी विभिन्न संस्थाओं को शक्ति देता है । हम इस समय कुछ ऐसी कार्रवाइयां कर रहे हैं जिनकी जानकारी मैं अभी सार्वजनिक नहीं कर सकता; परंतु हम निश्चित रूप से कार्रवाई कर रहे हैं । हम ईरान तथा लेबनान पर अत्यंत तीव्र आक्रमण कर रहे हैं ।”

भारत-ईरान के बीच सहयोग का दीर्घ इतिहास ! – डॉ. एस. जयशंकर

डॉ. एस. जयशंकर

नई दिल्ली – भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत ईरान के साथ सीधे एवं निर्णायक संवाद कर रहा है । इसके माध्यम से भारतीय ध्वजवाली नौकाओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा रही है । प्रत्येक भारतीय जहाज को अलग-अलग अनुमति दी जा रही है; इस उद्देश्य के लिए भारत एवं ईरान के बीच कोई नया औपचारिक समझौता नहीं किया गया है ।

जयशंकर ने आगे कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के बदले भारत ने ईरान को किसी भी प्रकार की छूट या लाभ देने का प्रस्ताव नहीं दिया है । भारत एवं ईरान के बीच सहयोग का दीर्घकालीन इतिहास है तथा उसी आधार पर भारत ने यह पहल की है । यह कोई “लेन-देन” की व्यवस्था नहीं है ।

सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी है कूटनीति ! – डॉ. जयशंकर

नई दिल्ली – हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संकट को सुलझाने के लिए डॉ. एस. जयशंकर ने संकेतों में अमेरिका को एक उपाय सुझाया है । उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाने के लिए युद्धनौकाएं नहीं, अपितु कूटनीति ही सबसे महत्त्वपूर्ण एवं प्रभावी साधन है ।

उन्होंने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि भारत के दृष्टिकोण से पारस्परिक समन्वय के माध्यम से किसी समाधान तक पहुंचना अधिक उचित होगा; किंतु वर्तमान में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है । यदि इस प्रक्रिया में अन्य संबंधित पक्षों को भी सम्मिलित किया जाए, तो यह पूरे विश्व के व्यापक हित में होगा ।

युद्ध में ईरान के टिके रहने का कारण !

हॉर्मुज क्षेत्र में बिछाई गई नौसैनिक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) के कारण अमेरिका चिंतित है ।

ट्रम्प ने कहा कि “ईरान का विनाश करना अत्यंत आवश्यक है ।” उन्होंने कहा कि ईरान के पास न तो पारंपरिक नौसेना है, न विमान-रोधी क्षमता एवं न ही दृढ वायुसेना; फिर भी वह युद्ध लड रहा है । ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि ईरान ने समुद्री मार्गों में जगह-जगह नौसैनिक बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं ।

पिछले सप्ताह तेल की कीमतें १०० डॉलर (लगभग ९,२३३ रुपये) प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जो वर्ष २०२२ के पश्चात पहली बार हुआ है । यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य शीघ्र नहीं खुला, तो यह कीमत १५० डॉलर (लगभग १३,८५० रुपये) प्रति बैरल तक पहुंच सकती है । इससे अमेरिका सहित पूरे विश्व में व्यापक आर्थिक अराजकता उत्पन्न हो सकती है ।