Prayer Festival : सांगली में ईसाइयों का ‘प्रेयर फेस्टिवल’ कार्यक्रम पुलिस द्वारा निरस्त !

असाध्य रोगों को ठीक करने के नाम पर हिन्दुओं के धर्मांतरण का षड्यंत्र

सांगली, १४ मार्च (वार्ता) – जिले के कवलपुर विमानतल के समीप आयोजित ‘महाराष्ट्र प्रेयर फेस्टिवल-२०२६’ नामक ईसाई मिशनरियों के कार्यक्रम में नियमों एवं प्रतिबंधों का उल्लंघन कर, साथ ही असाध्य रोगों को ठीक करने का असत्य दावा कर हिन्दुओं के धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा था । सकल हिन्दू समाज तथा हिन्दुत्वनिष्ठों के प्रखर विरोध तथा नियमों के उल्लंघन के कारण सांगली ग्रामीण पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी है ।

क्या है संपूर्ण प्रकरण ?

कवलापुर (तहसील मिरज) में १३ से १५ मार्च की अवधि में चेन्नई स्थित ‘जीसस कॉल्स’ संस्था के डॉ.पॉल दिनाकरन, सैमुअल दिनाकरन एवं उनके अन्य सहयोगियों ने ‘महाराष्ट्र प्रेयर फेस्टिवल’ नामक एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था । इस कार्यक्रम में कथित चमत्कार, चंगाई (रोगमुक्ति सभा) तथा प्रार्थना के माध्यम से असाध्य रोगों को ठीक करने के दावे किए जा रहे थे । प्रशासन ने इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु जो शर्तें एवं नियम निर्धारित किए थे, आयोजकों द्वारा उनका उल्लंघन किया गया । जैसे ही यह संज्ञान में आया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से भोले-भाले हिन्दुओं के धर्मांतरण का षड्यंत्र हो रहा है, सकल हिन्दू समाज सहित स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने इसके विरुद्ध आवाज उठाया ।

कार्यक्रम में किए गए असत्य दावे

इस सभा में हिन्दुओं को भ्रमित करने हेतु कुछ व्यक्तियों को मंच पर बुलाकर उनके ‘अनुभव’ सुनाने के लिए कहा गया । मंच पर आए एक व्यक्ति ने बताया कि, “मुझे चौथे चरण (फोर्थ स्टेज) का कर्क रोग (कैंसर) था तथा आधुनिक चिकित्सकों ने कहा था कि मैं केवल १५ दिन जीवित रहूंगा; परंतु डॉ.पॉल दिनाकरन द्वारा प्रार्थना किए जाने पर मेरे शरीर से ‘दुष्ट आत्माएं’ निकल गईं एवं मैं स्वस्थ हो गया ।” सुजी नामक एक महिला ने दावा किया कि, “डॉ.पॉल दिनाकरन के मेरे सिर पर हाथ रखते ही मेरे रक्त संबंधी विकार ठीक हो गए तथा अध्ययन में अत्यंत कम ज्ञान होने के पश्चात भी मुझे स्नातक परीक्षा में ९९ प्रतिशत अंक प्राप्त हुए ।”

पुलिस की कठोर कार्रवाई

‘चिकित्सकीय उपचार त्याग कर केवल प्रार्थना से असाध्य रोग ठीक होते हैं’, ऐसा कुप्रचार कर समाज को छलने के विषय में सांगली ग्रामीण पुलिस ने विभिन्न धाराओं के अंतर्गत संबंधितों पर अभियोग पंजीकृत कर इस कार्यक्रम को निरस्त करने का आदेश दिया है । सांगली ग्रामीण पुलिस थाने के निरीक्षक बी.ए.तलेकर ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह सूचना दी । डॉ.दिलीप भोरे, डॉ. रावसाहेब वाघमारे, वक्ता बिशप डॉ.पॉल दिनाकरन, सैमुअल दिनाकरन तथा एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस ने अभियोग पंजीकृत किया है ।

(दिलीप भोरे तथा रावसाहेब वाघमारे ये दोनों धर्म परिवर्तित हुए (कन्वर्टेड) ईसाई है । वे धर्मांतरण करते है, मात्र उनके हिंदी नाम बदलते नहीं । हिन्दू नाम धारण कर हिन्दुओं का धर्मांतरण करना आसान होता है । ऐसे धोखेबाज ईसाईयों से हिन्दुओं को सतर्क रहना चाहिए – संपादक )

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति तथा हमीद दाभोलकर अब किस बिल में छिपे हैं ? – पूर्व विधायक नितिन शिंदे

पूर्व विधायक नितिन शिंदे

सांगली, १४ मार्च (वार्ता) – हिन्दू धर्म की परंपराओं तथा साधु-संतों के विषय में निरंतर ‘अंधश्रद्धा’ का शोर मचाने वाले डॉ.हमीद दाभोलकर एवं उनकी अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) अब डॉ. पॉल दिनाकरन के कार्यक्रम के समय किस बिल में छिपकर बैठी है ? यह तीखा प्रश्न ‘हिन्दू एकता आंदोलन’ के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री नितिन शिंदे ने पत्रकार परिषद में किया । ईसाई प्रार्थना सभा के नाम पर होने वाले अंधविश्वास के प्रचार पर ‘अंनिस’ द्वारा साधी गई चुप्पी का उन्होंने तीव्र निषेध किया ।

‘अंनिस’ का दोहरा चरित्र उजागर !

नितिन शिंदे ने आगे कहा कि, जब पॉल दिनाकरन जैसे लोग सांगली आकर प्रार्थना के माध्यम से असाध्य रोगों को ठीक करने के दावे करते हैं तथा अंधविश्वास को बढावा देते हैं, तब जिले के ‘अंनिस’ पदाधिकारी कहां लुप्त हो जाते हैं ? क्या डॉ.हमीद दाभोलकर को यह पाखंड दिखाई नहीं देता ? केवल हिन्दुओं को लक्ष्य बनाने वाली इस टोली का वास्तविक मुखौटा अब जनता के सामने आ गया है । महाराष्ट्र राज्य का बजट सत्र चल रहा है एवं ऐसे समय में सांगली में इस प्रकार का विवादित कार्यक्रम आयोजित होना गंभीर विषय है । प्रशासन को ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति ही नहीं देनी चाहिए थी । महाराष्ट्र जादू-टोना विरोधी अधिनियम का उल्लंघन करने वाले इस कार्यक्रम पर सरकार को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ।

संपादकीय भूमिका

  • असाध्य रोगों को उपचारित (इलाज) करने का मिथ्या दावा कर हिन्दुओं का धर्मांतरण करने का यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है । हिन्दुत्वनिष्ठों का मानना है कि प्रशासन को केवल अभियोग (केस) पंजीकृत कर रुकना नहीं चाहिए, अपितु ऐसे पाखंडी धर्मप्रचारकों पर स्थायी प्रतिबंध लगाना चाहिए ।
  • सदैव हिन्दू प्रथाओं तथा परंपराओं की आलोचना करने वाले ‘अंनिस’ (अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति) के लोग, जब चमत्कारों के झूठे दावों द्वारा लोगों को छला जा रहा है, तब किस बिल में छिपे हुए हैं ?