Astrologer Dr. Anil Vaidya : वर्ष २०२६-२७ में भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ के रूप में घोषित होने की संभावना !

  • अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष-भाष्यकार डॉ. अनिल वैद्य की भविष्यवाणी

  • वर्ष २०२५ से २०३२ का काल विश्व के लिए अत्यंत कठिन

  • वर्ष २०३३ तक पाकिस्तान राष्ट्र मानचित्र से विलुप्त होने की संभावना !

अमरावती / नागपुर – अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष-भाष्यकार डॉ. अनिल वैद्य द्वारा प्रस्तुत ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार वर्ष २०२६-२७ में भारत स्वयं को एक ‘शांतिप्रिय हिन्दू राष्ट्र’ के रूप में घोषित करने की संभावना है ।

डॉ. अनिल वैद्य ने कहा –

१. इस कालखंड में भारत का विश्व में एक ‘महाशक्ति’ के रूप में व्यापक प्रभाव स्थापित होगा । जब पाश्चात्य देश तथा पडोसी राष्ट्र युद्ध की ज्वाला में दग्ध हो रहे होंगे, तब विश्व को शांति का मार्ग दिखाने के लिए भारत अग्रसर होगा । इस पृष्ठभूमि में भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना केवल औपचारिकता नहीं होगा, अपितु समय की आवश्यकता बन जाएगी एवं विश्व को भारत का मार्गदर्शन स्वीकार करना पडेगा ।

२. सूर्यमंडल में शुभ ग्रह माने जाने वाले गुरु वर्तमान में ‘अतिचार’ (अत्यधिक तीव्र) गति से भ्रमण कर रहे हैं । ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब गुरु ऐसी गति से मिथुन से कुंभ राशि तक संचरण करते हैं, तब विश्व में व्यापक परिवर्तन एवं उथल-पुथल होती है । वर्तमान में चल रहे रूस-यूक्रेन तथा ईरान-इस्रायल युद्ध भी इसी ग्रह-स्थिति के परिणाम माने जा रहे हैं ।

३. वर्ष २०२५ से २०३२ का काल विश्व के लिए अत्यंत कठिन माना जा रहा है । इस अवधि में अनेक देशों में आत्मकेंद्रित नेतृत्व के कारण युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होकर व्यापक नरसंहार होने की आशंका है ।

४. वर्ष २०२९ के पश्चात संभावित वैश्विक महायुद्ध में भारत अत्यंत निर्णायक एवं महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ।

५. इस वैश्विक संघर्ष में पाश्चात्य देशों को भारी आर्थिक क्षति होगी; किंतु भारत को इसका अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा । भारत विकसित तथा विकासशील देशों की श्रेणी में तीव्र गति से आगे बढेगा ।

६. वर्ष २०३३ तक पाकिस्तान का अस्तित्व पूर्णतः समाप्त होकर उसके राष्ट्र के रूप में मानचित्र से गायब होने की संभावना व्यक्त की गई है ।

संपादकीय भूमिका

  • इसी प्रकार की भविष्यवाणियां बिहार के आचार्य अशोक कुमार मिश्र तथा अन्य अनेक ज्योतिषशास्त्रियों ने भी व्यक्त की हैं । ‘हिन्दू राष्ट्र’ की चर्चा से जिन लोगों को असहजता होती है, उन्हें ऐसे समाचारों से अपच हो जाए, तो उसमें आश्चर्य नहीं । मूलतः वैदिक ज्योतिष जो कहता है, वह यथार्थ भविष्य होता है । अतः ऐसे अधोगामी (पतन की ओर जाने वाले) हिन्दू-विरोधियों ने अभी से देश छोड़ने की योजना बना ली, तो वह उनके लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होगा ।
  • ज्योतिषशास्त्र द्वारा बताए गए इस भीषण आपत्काल को देखते हुए अपने संरक्षण के लिए तथा हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में आध्यात्मिक बल प्राप्त करने हेतु प्रत्येक व्यक्ति को साधना एवं ईश्वरानुसंधान ( ईश्वर प्राप्ति का प्रयास) बढाना आवश्यक है ।