(और इनकी सुनिए…) ‘हम प्रतिद्वंद्वी नहीं, अपितु भागीदार हैं !’ – Chinese Foreign Minister Wang Yi

  • भारत के साथ संबंधों पर चीन का परिवर्तित स्वर

  • संघर्ष से एशिया को हानि हो रही है, ऐसा भी किया दावा

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदीजी

बीजिंग (चीन) – भारत एवं चीन को ‘पडोसी देश’ होने के नाते मित्रता बनाए रखनी चाहिए तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए । साथ ही दोनों देशों को विकास तथा सहयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए । भारत एवं चीन ‘ग्लोबल साउथ’ (यूरोप तथा उत्तर अमेरिका के बाहर के विकासशील देशों के समूह) के महत्त्वपूर्ण देश हैं तथा दोनों के बीच गहरे ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध हैं । पारस्परिक विश्वास एवं सहयोग से दोनों देशों के विकास को गति मिल सकती है, जबकि संघर्ष एशिया के विकास के लिए हानिकारक सिद्ध होगा, ऐसा वक्तव्य चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने दिया । वे चीन की संसद के सत्र से पहले आयोजित वार्षिक पत्रकार सम्मेलन में बोल रहे थे ।

इस वर्ष भारत BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका का समूह; अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान एवं संयुक्त अरब अमीरात भी सम्मिलित हैं) की मेजबानी करेगा, जबकि वर्ष २०२७ में चीन इस सम्मेलन की मेजबानी करेगा ।

वांग यी ने आगे कहा कि वर्ष २०२४ में रूस के कजान में हुई बैठक से दोनों देशों के संबंधों को नया प्रारंभ मिला तथा उसके पश्चात तियानजिन में हुई वार्ता ने संबंधों को और सुधारने में सहायता की । कुछ दिन पूर्व ही दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद, व्यापार तथा लोगों के बीच संपर्क बढा है । द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड बनाया है तथा इसका सीधा लाभ दोनों देशों की जनता को हुआ है । दोनों देशों को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए ।

लद्दाख के डोकलाम (Doklam) क्षेत्र में हुए सैन्य टकराव के उपरांत भारत-चीन संबंध लगभग ५ वर्षों तक ठंडे रहे थे; किंतु वर्ष २०२४ में कजान में प्रधानमंत्री (श्री. नरेंद्र मोदीजी) Narendra Modi और शी जिन पींग (Xi Jinping) की भेंट के पश्चात संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया आरंभ हुई ।

संपादकीय भूमिका 

‘हिन्दी-चीनी भाई-भाई’ कहते हुए भारत पर आक्रमण कर भारत की सहस्रों वर्ग किलोमीटर भूमि हडपनेवाले चीन पर कौन विश्वास करेगा ? चीन को पहले यह व्यवहार में दिखाना चाहिए कि वह वास्तव में भागीदार है एवं उसके उपरांत ही ऐसी बातें करनी चाहिए !