Rupali Chakankar : (और इनकी सुनिए…) ‘महिलाओं को पोथियों-पुराणों में आबद्ध किया गया है !’

  • महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रूपाली चाकणकर का वक्तव्य

  • ‘महिलाओं को संविधान का बोध होना चाहिए’, ऐसा भी दिया वक्तव्य

महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रूपाली चाकणकर

मुंबई – समाज की महिलाओं को संविधान का बोध होना चाहिए । हमने महिलाओं को पोथियों-पुराणों में उलझा दिया है; परंतु हमारे द्वारा संविधान का पठन शेष रह गया । पुत्री को ससुराल भेजते समय उसके हाथ में संविधान दें, ऐसा वक्तव्य महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रूपाली चाकणकर ने दिया है ।

आयोग की ओर से ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में मुंबई के रवींद्र नाट्य मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । उस समय वे बोल रही थीं । (आज धर्मशिक्षा के अभाव के कारण मूलतः हिन्दू समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी हिन्दू धर्म से विमुख हो रही है । अतः इस प्रकार का वक्तव्य हिन्दू-विरोधी नैरेटिव (कथानक) को पुष्ट करने का ही एक प्रकार है । इस आधार पर यदि कोई यह प्रश्न उपस्थित करे कि ‘क्या रूपाली चाकणकर ‘डीप स्टेट’ की अभिकर्ता (एजेंट) हैं ?’, तो इसमें त्रुटि कहां है ? – संपादक)

(डीप स्टेट अर्थात सरकारी अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों, निजी संस्थाओं तथा अरबपति उद्योगपतियों का एक गुप्त जाल । इस व्यवस्था के माध्यम से सरकारी नीतियां निजी संस्थाओं के अनुकूल बनाई जाती हैं अथवा देश में उनके अनुकूल वातावरण निर्मित किया जाता है ।)

संपादकीय भूमिका 

  • पोथियों-पुराणों की शिक्षा से ही महिलाओं को नैतिक एवं धार्मिक अधिष्ठान प्राप्त होता है । उसी से सशक्त कुटुंब-व्यवस्था निर्मित हो सकती है । आज महिलाओं को वास्तविक रूप में उसी अधिष्ठान की आवश्यकता है । अतः ‘उनमें महिलाओं को फंसाया गया है’, यह कथन निंदनीय, तर्कहीन एवं हिन्दू -द्वेषपूर्ण ही है ! जब तक चाकणकर हिन्दुओं से सार्वजनिक क्षमा याचना नहीं करतीं, तब तक हिन्दुओं को इसका संगठित रूप से विरोध करना चाहिए !
  • चाकणकर ऐसा क्यों नहीं कहतीं कि ‘कुरान-बाइबल में महिलाओं को आबद्ध किया गया है’ ? क्या महिला दिवस के औचित्य पर संविधान के प्रति जागृति लाने की आड़ में वे अपने हिन्दू-द्वेष की खुजली शांत कर रही हैं ?