राष्ट्रहितार्थ
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उत्तरप्रदेश की अर्थव्यवस्था में ४ लाख करोड रुपये की वार्षिक वृद्धि होने की संभावना !
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पर्यटकों की संख्या वर्ष २०२४-२५ में १६ से २० करोड से अधिक हुई !
लगभग २ वर्ष पूर्व अयोध्या में श्रीरामलल्ला (श्रीराम का बालक रूप) की प्राणप्रतिष्ठा हुई । उस समय दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के माध्यम से कुछ लेखों के द्वारा ‘मंदिरों पर आधारित हिंदुओं की अद्भुत अर्थव्यवस्था’, यह विषय प्रस्तुत किया गया था । हिंदुओं के मंदिर प्राचीन काल से ही धार्मिक होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को गति देनेवाले केंद्र थे । गांव, नगर, शहर एवं जनपद का विकास मंदिर केंद्रित था । अयोध्या में श्रीराममंदिर के निर्माण के कारण जो कुछ परिवर्तन पिछले २ वर्षों में हुए हैं, उससे यह पुनः सिद्ध हुआ है कि मंदिरों के कारण केवल एक श्रद्धा का केंद्र खड़ा नहीं होता, अपितु सहस्रो से लाखों लोगों के उदरभरण के लिए वह माध्यम बनता है । अयोध्या एवं उत्तरप्रदेश में हुए परिवर्तन हम इस लेख के माध्यम से जानते हैं । इससे ‘मंदिर पर आधारित संस्कृति का विकास’, यह विषय कितना महत्वपूर्ण है, यह भी ध्यान में आता है ।

१. ‘आई.आई.एम्. लखनऊ’ का प्रतिवेदन
‘आई.आई.एम्. लखनऊ’ के (‘भारतीय प्रबंधन संस्थान’ के) प्रतिवेदन के अनुसार श्रीराममंदिर के लोकार्पण के उपरांत देशभर में १ लाख करोड़ से अधिक रुपयों का व्यावसायिक कारोबार हुआ । इस प्रतिवेदन के अनुसार पर्यटन, निवेश, रोजगार एवं राजस्व में प्रभावशाली वृद्धि हुई है । ‘पर्यटन आधारित गतिविधियों से प्राप्त होनेवाला कर राजस्व २० से २५ सहस्र करोड़ रुपयों तक पहुंच सकता है’, ऐसा अनुमान है । आगामी ४ से ५ वर्षों में पर्यटन, परिवहन एवं आतिथ्य क्षेत्र में अनुमानतः १ लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियां निर्माण होने की संभावना है । भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदिरों का अंशदान अनुमानतः ३ लाख करोड से ६ लाख करोड रुपयों के मध्य है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का २.३ से ३ प्रतिशत है । श्रीराममंदिर इस मंदिर अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधारस्तंभ बना है ।

२. श्रीराममंदिर न्यास द्वारा कर के माध्यम से राजस्व
५ फरवरी २०२० से ५ फरवरी २०२५ की कालावधि में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट’ ने सरकार को अनुमानतः ४०० करोड रुपये कर के रूप में दिए हैं । इसमें २७० करोड रुपये ‘जी.एस.टी.’ (वस्तु एवं सेवा कर) एवं १३० करोड रुपये अन्य करों का समावेश है ।
‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट’ द्वारा पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार श्रीराममंदिर के संपूर्ण परिसर के निर्माण के लिए अनुमानतः १ सहस्र ९०० से २ सहस्र १५० करोड रुपये व्यय अपेक्षित है । भक्तों ने ३ सहस्र करोड़ रुपयों से अधिक दान दिया है ।
३. व्यापार में बड़ा कारोबार
श्रीराममंदिर खुलने के उपरांत अयोध्या में स्थानीय व्यापार में प्रचंड वृद्धि हुई है । विविध प्रतिवेदनों के अनुसार (जैसे एस.बी.आई. रिसर्च) अयोध्या के पर्यटन एवं संबंधित सेवाओं के कारण उत्तरप्रदेश की अर्थव्यवस्था में वार्षिक ४ लाख करोड रुपये की वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है ।
प्राणप्रतिष्ठा होने के उपरांत के प्रथम ६ महीनों में ही अयोध्या में २३ करोड से अधिक भक्तों ने भेंट दी । वर्ष के अंत तक यह संख्या ५० करोड के पार जाने का अनुमान है । मंदिर के समीप स्थित छोटे दुकानदारों की आय ४ से ५ गुनी बढ़ गई है, अर्थात उनकी प्रतिदिन की आय २ सहस्र ५०० से ३ सहस्र रुपयों तक पहुँच गई । अयोध्या प्रभाग का ‘जी.एस.टी.’ संकलन वर्ष २०२१-२२ में अनुमानतः ९९० करोड था, जो वर्ष २०२३-२४ में बढ़कर १ सहस्र ७९८ करोड रुपये पहुंच गया है । केवल अयोध्या ही नहीं, अपितु वाराणसी एवं मथुरा जैसे तीर्थक्षेत्रों के कारण उत्तरप्रदेश सरकार को पर्यटन से प्राप्त होनेवाला राजस्व प्रतिवर्ष अनुमानतः २० सहस्र से २५ सहस्र करोड रुपयों से बढ़ने के संकेत हैं ।
४. बढ़ती भक्त/पर्यटक संख्या
पूर्व की भक्त/पर्यटक संख्या वर्ष २०१७ में अयोध्या में केवल २ लाख भक्त/पर्यटकों ने भेंट दी थी । वर्ष २०२३ में यह संख्या ५ करोड ७५ लाख थी, जो वर्ष २०२४-२५ में १६ से २० करोड से अधिक हो गई है ।
५. उत्तरप्रदेश को हुए लाभ
पर्यटन क्षेत्र में अनुमानतः २ लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार निर्माण हुए हैं । होटल, गाइड्स (पर्यटन मार्गदर्शक), टैक्सीचालक एवं हस्तकला कारीगरों को इसका बड़ा लाभ हुआ है । अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन एवं चौमार्गी सड़कों का जाल निर्माण हुआ है । शहर में ७५ से अधिक नए होटलों के प्रकल्प चल रहे हैं ।
अयोध्या अब विश्व के मानचित्र पर एक ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल हब’ (वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र) के रूप में उदय हुई है । उत्तरप्रदेश को १ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है । अयोध्या का कायाकल्प करने के लिए सरकार ने ‘अयोध्या मास्टर प्लान २०३१’ के अंतर्गत अनुमानतः ३२ सहस्र करोड़ रुपयों के प्रकल्प कार्यान्वित किए हैं । ‘महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट’ एवं ‘अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन’ के कारण देश-विदेश के पर्यटकों का प्रवाह बढ़ा है । रामपथ, भक्तिपथ एवं जन्मभूमि पथ जैसे भव्य मार्गों के चौड़ीकरण के कारण शहर के भीतर का यातायात सुलभ हुआ है । इन मार्गों के किनारे सौर ऊर्जा पर चलनेवाले दीप एवं आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं ।
६. पंचतारांकित होटल्स एवं आतिथ्य व्यवसाय
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण अयोध्या में रहने की सुविधा करने के व्यवसाय में क्रांति हुई है । ‘ताज’, ‘रेडिसन’ एवं ‘मैरियट’ जैसे बड़े होटल संस्थानों ने अयोध्या में स्वयं के प्रकल्प आरंभ किए हैं । इससे उच्चवर्गीय पर्यटकों की सुविधा हुई । उत्तरप्रदेश सरकार ने स्थानीय निवासियों को उनके घरों का रूपांतरण ‘होमस्टे’ (स्थानीय परिवार के पास निवास की सुविधा) में करने के लिए प्रोत्साहित किया । आज अयोध्या में ६०० से अधिक पंजीकृत ‘होमस्टे’ हैं । इससे सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों को आय का नया साधन मिला । पुरानी धर्मशालाओं का नवीनीकरण कर वहां भी सुख-सुविधाएं बढ़ाई गई हैं ।
७. सहस्रों नौकरियों का निर्माण
मंदिर ट्रस्ट, होटल्स एवं हवाई अड्डे पर सहस्रों युवाओं को सुरक्षा रक्षक, ‘हाउसकीपिंग’, रिसेप्शनिस्ट एवं प्रबंधन क्षेत्र में नौकरियां मिलीं । टैक्सी एवं ‘ई-रिक्शा’ के कारण स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला है । अधिकृत ‘गाइड्स’ की मांग बढ़ने से सहस्रों युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस क्षेत्र में सम्मिलित किया गया । फूलों के हार, ‘रामनाम’ के दुपट्टे, लड्डू का प्रसाद एवं लकड़ी की हस्तकला की वस्तुओं का विक्रय करनेवाले छोटे व्यापारियों की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई है । अयोध्या की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (एक जनपद एक उत्पाद) योजना के अंतर्गत गुड़ के पदार्थ एवं लकड़ी की हस्तकला की वस्तुओं की वैश्विक मांग है । ‘ई-कॉमर्स’ के माध्यम से इन वस्तुओं को बेचने का बड़ा मंच उपलब्ध हुआ है ।
७ अ. स्थानीय लोगों की आय बढ़ी ! : इस आर्थिक उलटफेर का सर्वाधिक बड़ा परिणाम स्थानीय लोगों के जीवन स्तर पर हुआ है । अयोध्या के एक सामान्य दुकानदार अथवा रिक्शाचालक की आय जो पूर्व में दिन की ३००-४०० रुपये थी, वह अब औसत २ से २ सहस्र ५०० रुपयों तक पहुंच गई है । बढ़ते पर्यटन के कारण स्थानीय युवाओं में अंग्रेजी बोलने का कौशल एवं ‘डिजिटल पेमेंट’ उपयोग करने का प्रमाण बढ़ा है ।
जिन स्थानीय लोगों की भूमि मार्ग के समीप थी, उनकी भूमि के मूल्यों में ५०० से १००० प्रतिशत वृद्धि हुई । अनेक लोगों ने अपने पुराने घर होटल अथवा दुकानों के लिए किराए पर देकर स्थायी आय का मार्ग खोज लिया है ।
७ आ. महिला सशक्तिकरण : अनेक महिला बचत समूह अब प्रसाद बनाने, हस्तकला एवं ‘होमस्टे’ प्रबंधन में सक्रिय हुए हैं, जिससे घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है ।
मंदिर निर्माण का विरोध करनेवाले बुद्धिजीवियों को तमाचा !
८. अयोध्या के धार्मिक स्थलों को जोड़ना
अयोध्या का विकास केवल एक शहर का विकास नहीं है, अपितु वह उत्तरप्रदेश के ‘स्पिरिचुअल टूरिज्म’ (आध्यात्मिक पर्यटन) मॉडल का आधारस्तंभ है । सरकार ने अयोध्या को केंद्र में रखकर आसपास के धार्मिक स्थलों को एक सूत्र में पिरोया है ।
८ अ. धार्मिक पर्यटन सर्किट : अयोध्या आनेवाला पर्यटक केवल श्रीराममंदिर तक ही सीमित न रहे, अपितु वह आसपास के संपूर्ण परिसर का अनुभव करे, इसके लिए ‘रामायण सर्किट’ विकसित किया गया है ।
८ आ. चौदह कोसी एवं पंच कोसी परिक्रमा पथ : भक्तों की सुविधा के लिए ये परिक्रमा मार्ग आधुनिक सुख-सुविधाओं से सज्जित किए जा रहे हैं । इससे स्थानीय गांवों की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिल रहा है ।
८ इ. सरयू रिवर फ्रंट : ‘साबरमती रिवर फ्रंट’ की तर्ज पर सरयू नदी का तट विकसित किया जा रहा है । यहां चलाई जानेवाली ‘जटायु क्रूज’ एवं ‘सोलर बोट्स’ पर्यटकों के मुख्य आकर्षण सिद्ध हो रहे हैं ।
अयोध्या अब वाराणसी (काशीविश्वनाथ) एवं प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) के साथ ‘टूरिस्ट ट्रायंगल’ के रूप में जुड गई है । इससे एक ही यात्रा में पर्यटक तीनों तीर्थक्षेत्रों के दर्शन कर सकते हैं ।
९. निवेश के प्रमुख अवसर
अयोध्या में वर्तमान में बड़े स्तर पर निजी निवेश की संभावना है । उत्तरप्रदेश सरकार ने यहां निवेश सुलभ करने के लिए अनेक छूट घोषित की हैं ।
अ. होटल्स : केवल पंचतारांकित होटल्स ही नहीं, अपितु ‘बजेट होटल्स’ (कम मूल्य वाले होटल) एवं ‘गेस्ट हाउस’ (अतिथि गृह) की अभी भी बड़ी न्यूनता है ।
आ. यातायात व्यवस्था : हवाई अड्डे एवं रेलवे टर्मिनल के विस्तार के कारण माल एवं पर्यटकों के परिवहन के लिए निजी टैक्सी सेवा, ई-बस एवं ट्रेवल एजेंसी की बड़े स्तर पर आवश्यकता है ।
इ. स्वास्थ्य सेवा का अवसर : करोड़ों पर्यटकों के आगमन के कारण वहां वैश्विक स्तर के चिकित्सालयों, ‘डायग्नोस्टिक सेंटर्स’ (रोगनिदान केंद्र) एवं ‘वेलनेस सेंटर्स’ (स्वास्थ्य केंद्र) की आवश्यकता निर्माण हुई है ।
उत्तरप्रदेश सरकार ने अयोध्या में निवेश करनेवालों के लिए विशेष नीतियां बनाई हैं । व्यवसाय के लिए आवश्यक अनुमतियां तीव्र गति से प्राप्त होने के लिए विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है । होटल व्यवसाय के लिए भूमि के क्रय पर एवं निर्माण पर विशेष ‘सब्सिडी’ (अनुदान) दी जा रही है ।
१०. निवेश का दूरगामी लाभ
विशेषज्ञों के मतानुसार अयोध्या में आज किया गया १ रुपये का निवेश आगामी ५ वर्षों में १० से १५ गुना बढ़ने की संभावना है; क्योंकि अयोध्या अब केवल भारतीय भक्तों का ही नहीं, अपितु थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया एवं दक्षिण कोरिया जैसे देशों के पर्यटकों का भी केंद्र बन रही है ।
मंदिरों के कारण कुल मिलाकर क्या परिवर्तन होता है ? ‘मंदिरों की अपेक्षा चिकित्सालय बनाओ, उद्योग खड़े करो, मंदिरों की अपेक्षा प्रसाधन गृह बनाओ’, इत्यादि भाषण दिए जाते हैं । ‘मंदिरों से रोजगार मिलनेवाला है क्या ?’, ऐसे वक्तव्य दिए जाते हैं । ऐसे वक्तव्य देनेवालों को मंदिर से क्या हो सकता है ?, इसका पाठ ही अयोध्या के श्रीराममंदिर ने सिखा दिया है । अयोध्या के इस उदाहरण के कारण देशभर में मंदिर आधारित अर्थव्यवस्था निर्माण करने का विचार किया जा रहा है ।
श्री गुरुचरणार्पणमस्तु ।
– श्री यज्ञेश सावंत, सहसंपादक, दैनिक ‘सनातन प्रभात’, पनवेल । (२५.२.२०२६)

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