Harvard University Apologizes : संस्कृत से जुडी आपत्तिजनक छवि पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने क्षमा (माफी) मांगी ।

(उपरोक्त चित्र प्रकाशित करके किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि हिंदू विरोधियों द्वारा किए गए आपत्तिजनक कृत्य के बारे में लोगों को जागरूक करना है। – संपादक)

वॉशिंगटन डीसी (अमेरिका) –  अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने अपने दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग की ओर से सोशल मीडिया पर प्रसारित एक विवादित पोस्ट को लेकर क्षमा मांगी है । इस पोस्ट में संस्कृत कार्यक्रम से संबंधित एक हिन्दू-विरोधी तथा अपमानजनक छवि दिखाई गई थी, जिसका हिन्दू समुदाय ने कडा विरोध किया । प्रारंभिक संस्कृत पाठ्यक्रम को दर्शाने के लिए उपयोग की गई इस छवि की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई थी ।

विश्वविद्यालय पर हिन्दू-विरोध को बढावा देने का आरोप ।

‘कोएलिशन ऑफ हिन्दूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (Coalition of Hindus of North America) ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय पर खुले तौर पर हिन्दू-विरोध को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया । संगठन का कहना है कि संबंधित चित्र में संस्कृत तथा हिन्दू धर्म का अनुचित तथा अपमानजनक चित्रण किया गया है ।

उपयोग की गई छवि किसी भयावह फिल्म के दृश्य जैसी प्रतीत होती है, जिसमें माथे पर तिलक लगाए एक सांवले हिन्दू व्यक्ति के हाथ में भूत सी आकृतियां लटकती हुई दिखाई गई है । बताया गया कि इस चित्र को महाभारत के विषयों तथा भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से जोडा गया है, परन्तु इसकी प्रस्तुति को अपमानजनक बताया गया । ‘मास्टर ऑफ पपेट्स’ शीर्षक से यह चित्र अनिरुद्ध साईनाथ द्वारा बनाया गया बताया गया है ।

सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं – हार्वर्ड विश्वविद्यालय

विवाद बढने के बाद दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग ने एक वक्तव्य देकर पश्चाताप व्यक्त किया । संस्कृत कार्यक्रम के लिए असंवेदनशील छवि प्रकाशित होने पर विभाग ने क्षमा मांगी । अपनी बात में कहा कि संस्कृत शिक्षण की उनकी दीर्घ परंपरा रही है एवं वे इस भाषा तथा उससे जुडी बौद्धिक व सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं ।

विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सोशल मीडिया पर अपनाई जानेवाली आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है, जिससे प्रकाशित होनेवाली पोस्ट विभाग के उद्देश्यों तथा मूल्यों के अनुरूप हों ।

साथ ही यह भी कहा गया कि जिस पोस्ट पर विवाद हुआ है, उसका ‘द लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट’ से कोई संबंध नहीं है । यह संस्थान हार्वर्ड का एक स्वतंत्र तथा विशिष्ट अंग है ।

क्षमायाचना का स्वागत

‘कोएलिशन ऑफ हिन्दूज़ ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विवादित पोस्ट पर मांगी गई क्षमा मांगने का स्वागत किया । ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहे गए वक्तव्य में संगठन ने कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक संस्कृत के प्रति सम्मान व्यक्त होते देख उन्हें प्रसन्नता हुई है । संस्कृत ने विश्वभर की अनेक संस्कृतियों को प्रभावित किया है ।