जलगांव (महाराष्ट्र) के बेंडाळे महाविद्यालय में १२ वीं कक्षा की परीक्षा के समय की घटना !
(हिजाब अर्थात मुसलमान महिलाओं का सिर एवं गर्दन छिपाने का वस्त्र)

जलगांव : बारहवीं कक्षा की परीक्षा के लिए जाते समय कुछ हिन्दू छात्राओं को उनकी ओढ़नी एवं ‘स्कार्फ’ निकालने के लिए बाध्य किया गया; परंतु अन्य धर्मी छात्राओं को बुर्का एवं हिजाब पहनकर परीक्षा देने की छूट दी गई । स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठों ने इसके विरोध में बेंडाळे महाविद्यालय के प्राचार्य एवं जलगांव के जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत किया । ज्ञापन प्रस्तुति के उपरांत जिलाधिकारी ने इस घटना की पडताल कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया । (इसमें केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है, अपितु संबंधित शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए ! इस प्रकरण में जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को इसकी समीक्षा करना आवश्यक है ! – संपादक)
इस घटना के विषय में महाविद्यालय प्रशासन से शिकायत की गई । प्राचार्य ने संबंधित शिक्षकों पर उचित कार्रवाई करने की तथा उन्हें चेतावनी देने का आश्वासन दिया । महाविद्यालय में ओढ़नी पहनने के विषय में कोई भी आधिकारिक नियम नहीं बनाया गया है । उसके कारण छात्राओं पर कोई भी प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा ।
इस समय उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों ने छात्रों के साथ किसी प्रकार का धार्मिक, सांस्कृतिक अथवा व्यक्तिगत वेशभूषा के आधार पर भेदभाव नहीं होगा तथा पूरे राज्य में इसका कार्यान्वयन हो, यह मांग की ।
ओढ़नी को कूड़ेदान में फेंक देने की शिक्षकों की भाषा !संबंधित शिक्षकों ने छात्राओं के विषय में क्षोभजनक एवं अपमानजनक वक्तव्य दिया । उन्होंने कहा था, ‘‘परीक्षा के समय में ओडनी पहनकर नहीं आना चाहिए, यह सामान्य बात भी इनकी समझ में कैसे नहीं आती ? ओडनी कूड़ेदान में फेंक दीजिए ! (ऐसे शिक्षक मुसलमान छात्राओं के संदर्भ में वक्तव्य देने का साहस क्यों नहीं दिखाते ? हिन्दू छात्राओं को ऐसे वक्तव्यों के विरुद्ध स्वयं भी क्षात्रभाव से आवाज उठानी चाहिए ! – संपादक) संपादकीय भूमिकाइस प्रकार से अपमानजनक वक्तव्य देनेवाले शिक्षकों के विरुद्ध ‘पॉक्सो’ कानून के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ! |
संपादकीय भूमिका
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